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    टी-20 को नया मॉडल दे रही टीम इंडिया:लगातार जीत, कड़े फैसले, प्रयोग, कई मैच विनर, इससे बनी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टी-20 टीम

    2 hours ago

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    टी-20 क्रिकेट का स्वभाव हमेशा से अनिश्चित रहा है। यह वह फॉर्मेट है, जहां एक दिन की खराब बल्लेबाजी या एक ओवर की खराब गेंदबाजी पूरी कहानी बदल सकती है। यही वजह है कि टी-20 में लगातार दबदबा बनाना बेहद मुश्किल माना जाता है। लेकिन पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने इस धारणा को चुनौती दी है। साल 2024 में भारत ने बारबाडोस में दक्षिण अफ्रीका को हराकर दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीता था। उस जीत को कई विशेषज्ञों ने भारतीय टी20 क्रिकेट की नई शुरुआत बताया था। लेकिन असली कहानी दो साल बाद लिखी गई। मार्च 2026 में अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर लगातार दूसरा टी20 वर्ल्ड कप जीत लिया। वर्ल्ड कप बचाने वाला और तीसरी बार ट्रॉफी जीतने वाला भारत पहला देश बना। लेकिन इन दो ट्रॉफियों से भी बड़ी कहानी यह है कि भारत ने पिछले दो वर्षों में टी20 क्रिकेट में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिसमें जीत किसी एक खिलाड़ी या एक मैच पर निर्भर नहीं रहती। यह टीम प्रयोग करती है, हर सीरीज में खिलाड़ियों को बदलती है, रणनीति में बदलाव करती है, लेकिन जीत का पैटर्न नहीं बदलता। यही वजह है कि क्रिकेट जगत में अब यह कहा जाने लगा है कि टीम इंडिया टी20 क्रिकेट की नई सुपरपावर बन चुकी है। भारत आईसीसी रैंकिंग में भी दुनिया की नंबर-1 टीम है। लेकिन इतिहास की सबसे महान टीम बनने के लिए यह दबदबा कई साल तक कायम रखना होगा। इस टीम एनालिसिस में जानते हैं उन फैक्टर्स के बारे में, जिससे भारत के दुनिया पर राज करने वाली टी20 टीम बनने की शुरुआत हुई है... 1. लगातार जीत का पैटर्न: दो वर्ल्ड कप के बीच सभी द्विपक्षीय सीरीज जीतीं भारत ने सभी 8 सीरीज और एशिया कप भी जीता । भारत ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप कोई मैच हारे बिना जीता था। यह लगातार जीत का पैटर्न उस टूर्नामेंट के बाद भी जारी रहा। पिछले वर्ल्ड कप से हाल ही में खत्म हुए वर्ल्ड कप के बीच भारत ने सभी आठों ​द्विपक्षीय सीरीज जीती। एशिया कप भी अपने नाम किया। इस दौरान टीम इंडिया ने 50 में से 41 टी-20 जीते हैं जबकि सिर्फ 7 हारे हैं। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी बड़ी टीमों के अलावा जिम्बाब्वे, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसी छोटी टीमों को भी द्विपक्षीय सीरीज में धूल चटाई। पिछले दो सालों में भारत ने हर 7 में से 6 टी-20 मैच जीते हैं। 2. कड़े और स्मार्ट फैसले: मैनेजमेंट ने ‘नाम’ के बजाय ‘इम्पैक्ट’ को चुना साल 2024 की जीत के बाद जब रोहित-विराट जैसे दिग्गज हटे, तो लगा कि वैक्यूम पैदा होगा। लेकिन टीम मैनेजमेंट ने ‘नाम’ के बजाय ‘फॉर्म’ और ‘इम्पैक्ट’ को ज्यादा तरजीह दी। कप्तानी के दावेदार माने जा रहे गिल को 2026 वर्ल्ड कप टीम से बाहर रखना दर्शाता है कि टीम अब ‘टैक्टिकल फिट’ और ‘स्ट्राइक रेट’ को ज्यादा तवज्जो दे रही है। गिल की जगह सैमसन को लाना व इशान की फॉर्म को स्वीकार करना इसका सबूत है। वर्ल्ड कप में जब टॉप ऑर्डर में 3 लेफ्ट-हैंडर काम नहीं कर रहे थे, तो संजू को वापस लाए। 3. द्रविड़ ने रखी नींव और लक्ष्मण की टैलेंट पाइपलाइन इस डॉमिनेंस की नींव राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के समय रखी गई। गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव को एक सेट टीम मिली, जिसमें उन्होंने अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे युवाओं को शानदार तरीके से फिट किया। द्रविड़ ने टीम में एक विनिंग टेम्पलेट सेट किया और सीनियर खिलाड़ियों को निडर होकर खेलने की आजादी दी। लक्ष्मण ने एनसीए में बेंच स्ट्रेंथ तैयार की। अब भारत की ‘बी’ टीम भी इंटरनेशनल टीम को हराने का माद्दा रखती है। कोच गंभीर ने वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद द्रविड़-लक्ष्मण को इस जीत का श्रेय भी दिया। 4. मजबूत बेंच स्ट्रेंथ: दो साल में करीब तीन टीम बराबर खिलाड़ी आजमाए, फिर भी जीते पिछले दो साल में 33 खिलाड़ी आजमाए, लगभग हर सीरीज में अलग कॉम्बिनेशन। भारत ने द्विपक्षीय सीरीज में बेंच स्ट्रेंथ को आजमाया। जिम्बाब्वे, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफ्रीका की सीरीज में अलग कॉम्बिनेशन नजर आए। इनमें तिलक, बिश्नोई, जितेश, राणा, मुकेश आदि शामिल रहे। पिछले वर्ल्ड कप से भारत ने 33 प्लेयर आजमाए और 50 में से 41 टी20 जीते। यानी, 3 टीम खिलाकर भी मजबूती वही रही। भारत ने टी-20 क्रिकेट में 7 बार 250 का आंकड़ा पार किया है। इसमें 6 बार ऐसा अक्टूबर 2024 के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में हुआ है। इन सभी 6 पारियों में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा एकादश का हिस्सा रहे हैं। 5. कप्तान और कोच : गंभीर का एग्रेसिव माइंडसेट, सूर्यकुमार की घातक कप्तानी कोच गंभीर ने आते ही ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ रणनीति को लागू किया। वहीं, सूर्या का 80.77 जीत प्रतिशत बताता है कि वे टैक्टिकल फैसलों में कितने सटीक रहे। उनकी कप्तानी पारंपरिक नहीं है। वह बैटिंग की तरह कप्तानी में भी जोखिम लेते हैं। मैच-अप आधारित रणनीति, तेज फैसले और आक्रामक फील्ड सेटिंग उनकी शैली है। 6. मैच विनर खिलाड़ियों की फौज: हर सीरीज से हमें अलग-अलग स्टार मिले आठ द्विपक्षीय सीरीज में भारत के छह अलग-अलग खिलाड़ी (सुंदर, सूर्या, हार्दिक, तिलक, वरुण, अ​भिषेक) प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे। इन सीरीज में सैमसन, इशान, शिवम आदि ने खुद को साबित किया। अक्षर और कुलदीप ने स्पिन का बेहतरीन इस्तेमाल किया। बुमराह संकटमोचक बने रहे और हार्दिक पंड्या ने तीसरे तेज गेंदबाज की कमी नहीं खलने दी। इसी तरह, हालिया टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने 9 मैच खेले और 5 अलग-अलग खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। 7. बॉलिंग का ‘ब्रह्मास्त्र’: सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली टीम, सबसे बेहतर औसत 377 विकेट लिए, फुल मेंबर्स टीमों में सर्वाधिक। किसी भी टीम को ‘महान’ उसकी गेंदबाजी बनाती है। भारत ने पिछले वर्ल्ड कप से अब तक फुल मेंबर्स देशों में सर्वाधिक 377 विकेट चटकाए हैं। इसमें 19.46 रन प्रति विकेट का औसत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। गेंदबाजी में अगुआई बुमराह करते हैं। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप में 14 विकेट लिए और भारत के टॉप विकेट-टेकर रहे। वर्ल्ड कप में उनकी इकोनॉमी सिर्फ 6.2 की रही। फाइनल में उनका प्रदर्शन 4/15 रहा। 8. आक्रामक बैटिंग है नई अप्रोच: 150+ का स्ट्राइक रेट 8472 रन बनाए भारत ने पिछले 2 साल में। टीम की रणनीति स्पष्ट है- पावरप्ले से ही मैच पर नियंत्रण। इसका नजारा वर्ल्ड कप फाइनल में नजर आया, जब भारत ने पावरप्ले में 92 रन बनाए थे। 255 रन फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर था। पिछले वर्ल्ड कप से भारत ने सर्वाधिक 8472 रन बनाए हैं। इसमें 29.51 का उसका औसत, 157.32 का स्ट्राइक रेट बेस्ट है। इस दौरान सर्वाधिक 8 शतक, सर्वाधिक 473 छक्के और सर्वाधिक 751 चौके हैं।
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