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    टीचर 2027 तक TET पास करें- हरियाणा में आदेश जारी:वरना नौकरी से बाहर करें; यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों का क्या होगा?

    4 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में देश भर के सभी जूनियर हाईस्कूल तक के शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने का आदेश दिया है। यूपी सहित कई राज्य सरकारों ने इसका विरोध करते हुए रिव्यू याचिका दाखिल की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से अधिकांश याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। अब हरियाणा सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए अपने राज्य के सभी जूनियर हाईस्कूल तक के शिक्षकों को मार्च 2027 तक हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) पास करने का आदेश जारी कर दिया है। परीक्षा न पास करने वाले को सीधे नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा। हरियाणा सरकार के आदेश का यूपी पर कितना असर होगा? यूपी में कितने शिक्षकों को ये टीईटी परीक्षा देनी है? आखिर क्यों शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। पढ़िए ये खबर… सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 के आदेश में राज्य सरकारों को दो साल के अंदर सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास कराने का आदेश दिया है। मतलब इस आदेश के क्रम में यूपी में भी मार्च 2027 तक ही मोहलत है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों के दबाव में रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी। हालांकि कई राज्यों की रिव्यू याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। कानूनी विशषज्ञों की मानें तो यूपी की याचिका भी देर–सवेर खारिज हो सकती है। संसद में भी सपा सहित कई दलों के सांसदों ने टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर विरोध दर्ज कराया था। सरकार से अध्यादेश लाने की पुरजोर मांग भी की थी, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में हर राज्य को अपने जूनियर हाईस्कूल तक के शिक्षकों की टीईटी परीक्षा करानी ही होगी। हरियाणा सरकार ने मार्च 2027 तक टीईटी परीक्षा पास करने का दिया आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए हरियाणा सरकार ने 16 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि मार्च 2027 तक प्रदेश के सभी जूनियर हाईस्कूल (1 से 8 वीं तक) के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी होगा। फेल होने वाले या परीक्षा न देने वाले शिक्षकों को सीधे नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा। हरियाणा सरकार के इस आदेश का असर यूपी में भी होना तय माना जा रहा है। अभी तक यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन पर कोई निर्णय नहीं आया है। रिव्यू पिटीशन खारिज होती है तो सरकार के सामने टीईटी परीक्षा कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यूपी में परेशानी ये भी है कि मार्च 2027 में विधानसभा का चुनाव भी होना है। ऐसे में सरकार के पास इससे पहले टीईटी परीक्षा करानी होगी। यूपी विधानसभा में सपा सदस्यों की ओर से भी टीईटी को लेकर सवाल उठाया गया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाल देते हुए इस पर किसी तरह की राहत देने से साफ मना कर दिया है। प्रदेश में 1.86 लाख शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट प्रदेश में पहली से आठवीं तक के ऐसे शिक्षकों की संख्या 1.86 लाख है, जो टीईटी पास नहीं है। RTE Act (2009) और NCTE की 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना के तहत, कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों (नए नियुक्ति वाले और सेवारत दोनों) के लिए TET पास करना अनिवार्य है। पर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पहले 1.86 लाख ऐसे शिक्षक तैनात हैं, जो टीईटी नहीं पास हैं। बीएड, बीपीएड और बीटीसी के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई है। कई तो इंटर पास और मृतक आश्रित शिक्षक हैं। शिक्षकों के सामने संकट तब आया जब 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने आरटीई एक्ट के तहत दो साल के अंदर सभी जूनियर हाईस्कूल तक के शिक्षकों को परीक्षा पास करने का आदेश दिया था। सीटीईटी परीक्षा में 50 हजार शिक्षक बैठे सीबीएसई ने अभी 7 और 8 फरवरी को सीटीईटी (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) का आयोजन दो–दो पालियों में कराया था। उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मानें तो प्रदेश के लगभग 50 हजार शिक्षकों ने ये परीक्षा दी है। अभी इसका रिजल्ट नहीं आया है। यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा की अभी तय तारीख नहीं आई है। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में इसकी संभावना जताई जा रही है। इसका भी कई शिक्षक इंतजार कर रहे हैं। सबसे मुश्किल में बीपीएड और इंटर पास लगभग 80 हजार शिक्षक हैं। क्योंकि टीईटी के लिए ग्रेजुएशन के साथ डीईएलएड, बीएड पास होना अनिवार्य है। इन शिक्षकों को तो टीईटी परीक्षा में शामिल होने का भी अवसर नहीं मिलेगा। ----------------- ये खबर भी पढ़ें- BJP ने सपा से दो गुना ज्यादा फॉर्म-6 भरवाए:सियासी दलों ने सिर्फ 1% दावे-आपत्तियां की; 51 लाख वोटर्स ने खुद किया आवेदन विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के तहत अब तक करीब सवा लाख मतदाताओं के नाम काटने के लिए आपत्तियां भारत निर्वाचन आयोग के पास आई हैं। वहीं, नाम जुड़वाने के लिए अब तक 51 लाख लोगों ने आवेदन किया है। समाजवादी पार्टी, भाजपा और चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर नाम कटवाने के लिए साजिश रचने का लगातार आरोप लगा रही। ऐसे में सवाल उठना वाजिब है कि अब तक भाजपा ने कितने लोगों के नाम जुड़वाने और कटवाने के लिए आवेदन किया? सपा और अन्य राजनीतिक दलों ने कितने आवेदन किए? सपा के आरोपों में कितना दम है? आयोग का क्या कहना है? पढ़िए ये पूरी खबर…
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