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    दो PRD जवानों की हत्या में चार आरोपी बरी:बैंक में 10 साल पहले तिजोरी खोलने का था आरोप, सबूत नहीं जुटा सकी पुलिस

    54 minutes ago

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    बाराबंकी में करीब 10 साल पहले जिला सहकारी बैंक में हुई दो पीआरडी जवानों की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने जांच में सामने आई खामियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी को अहम माना। अदालत ने कहा कि केवल अनुमान या कल्पना के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष आरोपियों को घटना से जोड़ने वाला ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। घटना 5 अप्रैल 2016 की है। जिला सहकारी बैंक में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पीआरडी जवान ओमप्रकाश और देशराज की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद बदमाशों ने बैंक की तिजोरी खोलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। बैंक के चपरासी शत्रुघ्न प्रसाद की शिकायत पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 10 दिन बाद पुलिस ने पांच लोगों को पकड़ा पुलिस ने 15 अप्रैल को घटना का खुलासा करने का दावा किया था। कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा, वहाजुद्दीन उर्फ बादशाह और नाज मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने इनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें नाज मोहम्मद नाबालिग था, इसलिए उसकी फाइल किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी। CCTV और फॉरेंसिक रिपोर्ट को लेकर उठे सवाल सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए। अदालत के सामने आया कि बैंक में लगे CCTV की रिकॉर्डिंग को वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया। पुलिस ने जिन हथियारों और कपड़ों की बरामदगी का दावा किया था, उनकी फॉरेंसिक लैब से जांच की रिपोर्ट भी अदालत में पेश नहीं की गई। 13 गवाह आए, आरोपियों से जोड़ने वाला ठोस सबूत नहीं अभियोजन पक्ष ने बैंक कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों समेत करीब 13 गवाह पेश किए। इसके बावजूद आरोपियों को वारदात से जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया। यह भी स्पष्ट रूप से साबित नहीं हो सका कि हत्या बैंक लूटने के मकसद से की गई थी। करीब 10 साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा और वहाजुद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। नाज मोहम्मद की फाइल पहले ही अलग की जा चुकी थी।
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