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    दहेज हत्या के आरोपी बरी, कोर्ट ने पुलिस को फटकारा:सांप के काटने से हुई थी मौत, 3 साल जेल में रहे आरोपी

    13 hours ago

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    बुलंदशहर की एक अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में 32 वर्षीय युवक और उसके माता-पिता को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 24 वर्षीय महिला की मौत किसी आपराधिक कृत्य से नहीं, बल्कि सांप के काटने से हुई थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) शहजाद अली की अदालत ने गुरुवार को यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। तीनों आरोपियों ने इस मामले में करीब तीन वर्ष जेल में बिताए। अदालत ने इसे गंभीर अन्याय मानते हुए राज्य सरकार को प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की त्रुटिपूर्ण विवेचना के लिए जिम्मेदार जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आदेशित किया है कि मामले की खराब जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध उचित विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब जानिए मामला क्या था बचाव पक्ष के अधिवक्ता इकबाल अहमद खान के अनुसार, ममता देवी की शादी मई 2017 में खुर्जा निवासी दुकानदार सुमित कुमार से हुई थी। बच्चे को जन्म देने के लगभग 15 दिन बाद ममता घर में बेहोशी की हालत में मिलीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया। खुर्जा थाना पुलिस ने सुमित कुमार, उनके पिता देवेंद्र और मां रूपवती के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 304बी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। मेडिकल साक्ष्यों से बदली तस्वीर मुकदमे की सुनवाई के दौरान चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों से यह तथ्य सामने आया कि महिला की मौत सांप के विष (एनवेनोमेशन) के कारण हुई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में विसरा रिपोर्ट का हवाला देते हुए दलील दी कि उसमें पाए गए तत्व सांप के काटने से मेल खाते हैं। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मृतका के परिजनों द्वारा दहेज मांग या उत्पीड़न की कोई पूर्व शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। रिकॉर्ड पर यह भी आया कि ससुराल पक्ष ही महिला को तुरंत स्थानीय चिकित्सक के पास ले गया था, जहां प्रारंभिक रूप से सांप के काटने की बात कही गई थी। तहसीलदार की रिपोर्ट में भी मृत्यु का कारण सांप का काटना दर्ज था। इसके बावजूद पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के आदेश अदालत ने यूपी डीजीपी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जघन्य अपराधों की जांच के लिए सक्षम और प्रशिक्षित जांच अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि निर्दोष व्यक्तियों का गलत अभियोजन न हो। साथ ही, तत्कालीन जांच अधिकारी डीएसपी गोपाल सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
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