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    ठेकेदार बनकर कानपुर नगर निगम पहुंची LIU, मांगे टेंडर:पैसों का दिया ऑफर, पार्टी देकर खुलवाया भ्रष्टाचार का राज

    3 hours ago

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    कानपुर नगर निगम में चल रहे टेंडर रैकेट का खुलासा एक दिन में नहीं हुआ। इसके लिए एलआईयू की टीम ने करीब एक महीने तक अंडरकवर जांच की। टीम के सदस्य ठेकेदार बनकर नगर निगम पहुंचे और अधिकारियों-कर्मचारियों से टेंडर मांगे। टेंडर दिलाने के बदले उन्हें पैसों का ऑफर भी दिया गया। भरोसा जीतने के लिए एलआईयू अफसरों ने नगर निगम के कर्मचारियों के साथ आलीशान पार्टी तक की। अलग-अलग विभागों में पैठ बनाने के बाद कर्मचारियों ने टेंडर से जुड़ी कई अहम जानकारियां और फाइलें उनके सामने रख दीं। जनवरी 2026 में तैयार हुई एलआईयू की रिपोर्ट में नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार का पूरा काला चिट्ठा सामने आया था। नवंबर 2025 में शुरू हुई थी जांच सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस कमिश्नर ने नवंबर 2025 में एलआईयू को जांच के निर्देश दिए थे। केडीए, नगर निगम, आरटीओ, तहसील, केस्को, पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग की जांच के लिए छह टीमें लगाई गई थीं। हर टीम में चार से छह सदस्य थे। नगर निगम की जांच के लिए छह सदस्यीय टीम बनाई गई। एलआईयू कर्मियों ने स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, कर, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और भवन एवं नगर नियोजन विभाग में आना-जाना शुरू किया। इस दौरान ठेकेदारों और कर्मचारियों से जान-पहचान बढ़ाई गई। इसके बाद टीम के सदस्य खुद ठेकेदार बनकर टेंडर लेने के लिए नगर निगम पहुंचने लगे। टेंडर के लिए ‘पावरफुल कॉरिडोर’ से जुड़ने का दबाव एलआईयू की टीम ने जब टेंडर लेने की कोशिश की तो उसे बताया गया कि बिना प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आए काम मिलना मुश्किल है। टेंडर हासिल करने के लिए पहले ‘पावरफुल कॉरिडोर’ का हिस्सा बनना जरूरी बताया गया। सिंडिकेट तक पहुंच बनाने के लिए एलआईयू अफसरों ने नगर निगम के कई कर्मचारियों के लिए पार्टी आयोजित की। इसमें कर्मचारियों से नजदीकी बढ़ी और कुछ लोगों ने टेंडर के खेल से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कर दीं। फाइलों से खुला टेंडर घोटाले का राज भरोसा बढ़ने के बाद कर्मचारियों ने एलआईयू टीम के सामने कई अहम फाइलें भी रख दीं। इन फाइलों से टेंडर प्रक्रिया में चल रही गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की जानकारी सामने आई। एलआईयू कर्मियों ने ठेकेदारों और पार्षदों के बीच भी अपनी पैठ बनाई। वहां से मिली जानकारियों को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया। करीब एक महीने की जांच के बाद एलआईयू ने रिपोर्ट तैयार की और उसे विभागीय अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन और शासन को भी भेजा। सात महीने बाद शुरू हुई कार्रवाई एलआईयू ने जनवरी 2026 में अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। अब करीब सात महीने बाद नगर निगम में कार्रवाई शुरू हुई है। मौजूदा एसआईटी जांच में सामने आ रही कई बातें एलआईयू की सात महीने पुरानी रिपोर्ट में भी दर्ज हैं। इससे साफ है कि नगर निगम में टेंडर के खेल को लेकर खुफिया एजेंसी ने काफी पहले ही जिम्मेदार अधिकारियों को आगाह कर दिया था। इसके बावजूद कार्रवाई में करीब सात महीने का समय लग गया।
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