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    दिन में बॉडी मसाज, रात में 'स्पेशल सर्विस':कुख्यातों से किशोर बंदियों को नोंचवाते थे, 7 अफसर सस्पेंड, क्या जाएगी नौकरी, बेऊर की हैवानियत की कहानी

    14 hours ago

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    पटना के बेऊर जेल के अधीक्षक नीरज कुमार झा सहित 7 अफसरों को गृह विभाग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। कार्रवाई 20 जून 2026 को जिला प्रशासन और कारा निरीक्षणालय की टीम की करीब 8 घंटे की औचक छापेमारी और जांच रिपोर्ट के बाद की गई है। रिपोर्ट में जेल के अंदर की हैवानियत को उजागर किया गया है। बेऊर जेल के अंदर किशोरों का कैसे शोषण होता था, अफसर पैसे के लिए क्या-क्या करते थे, जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में...। सवाल-1ः बेऊर जेल के अंदर क्या होता था? जवाबः बिहार पुलिस मुख्यालय की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि जेल के भीतर एक ऐसा 'नरक' बना दिया गया था, जहां कानून के रक्षक (जेल अधीक्षक) ही भक्षक बन चुके थे और पैसों के लालच में इंसानी गरिमा और मानवाधिकारों का खुलेआम सौदा कर रहे थे। सिलसिलेवार तरीके से जानिए अंदर की कहानी… कुख्यातों से पैसा लेकर बंदियों से मालिश करवाते थे अफसर पैसा लेकर कुख्यात को देते हैं स्पेशल सर्विस जेल प्रशासन और कुख्यात अपराधियों के बीच एक गठजोड़ था। खूंखार बंदियों को जेल के अंदर विशेष सुविधाएं जैसे मोबाइल, अच्छा खाना, नशा की व्यवस्था करने के बदले पैसा लिया जाता था। पैसे के लिए बंदियों को करते थे टॉर्चर पैसा देने पर मनपसंद खाने की व्यवस्था मनमाने दामों पर सामान बेचते थे सवाल-2ः कैसे सामने आई बेऊर के अंदर की हैवानियत? जवाबः कुछ दिन पहले सहयोग पोर्टल पर कैदियों और बंदियों ने बेऊर जेल प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए ऑनलाइन आवेदन दिया था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद गृह सचिव कुंदन कुमार और जेल आईजी को जांच के निर्देश दिए गए। 20 जून को कारा मुख्यालय और पुलिस की टीम ने करीब आठ घंटे तक जेल में जांच की। सभी वार्डों का निरीक्षण हुआ। कैदियों, बंदियों से पूछताछ भी की गई। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल की अव्यवस्थाएं अचानक नहीं हुई हैं। वे लंबे समय से संस्थागत रूप ले चुकी हैं। बंदियों के भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। सवाल-3ः सरकार ने आरोपियों पर क्या कार्रवाई की? जवाबः बेऊर जेल में कथित भ्रष्टाचार, शारीरिक शोषण और संगठित अनियमितताओं के मामले में जेल प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जेल अधीक्षक, उपाधीक्षक, चार सहायक अधीक्षक और एक उच्च कक्षपाल समेत कुल 7 अधिकारी-कर्मियों को निलंबित किया गया है। जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में नीरज कुमार झा को विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर भेजा गया है। इधर, नीरज झा ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। बेऊर जेल के उपाधीक्षक अजय कुमार को भी निलंबित किया गया है। उन्हें मंडल कारा सुपौल भेजा गया है। सहायक जेल अधीक्षक शालिनी को निलंबित कर मंडल कारा शिवहर भेजा गया है। सहायक अधीक्षक अभिषेक कुमार को निलंबित कर मंडल कारा भभुआ भेजा गया है। सहायक अधीक्षक कुंदन कुमारी को निलंबित कर मंडल कारा शेखपुरा भेजा गया है। वहीं, सहायक अधीक्षक मनीष ठाकुर को निलंबित कर मंडल कारा कटिहार भेजा गया है। नीरज पर जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप सवाल-4ः क्या आरोपियों की नौकरी जा सकती है? जवाबः बिल्कुल। हालांकि, इसके लिए पहले इन पर FIR करनी होगी। सरकार ने अभी सिर्फ इनको निलंबित किया है। कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के मुताबिक, ऐसे गंभीर मामलों में निलंबन केवल पहला कदम होता है ताकि आरोपी अधिकारी अपने पद पर रहकर जांच को प्रभावित न कर सके। नीरज कुमार झा सहित बाकी अफसरों पर लगे आरोप, केवल विभागीय लापरवाही के नहीं हैं, बल्कि वे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आते हैं। इसलिए उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य विशेष कानूनों के तहत तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए, क्योंकि…
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