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    दिनेश शर्मा बोले- लखनऊ से रिश्ता हमेशा रहेगा:चुनौती को अवसर में बदलना मेरा स्टाइल, अंडमान-निकोबार को पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाऊंगा

    6 hours ago

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    लखनऊ के मेयर से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बनने और राज्यसभा तक पहुंचने वाले डॉ. दिनेश शर्मा को नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल बनाया है। वह नई सूचना के बाद लखनऊ के लोगों, प्रशासनिक हस्तियों से मिलकर सोमवार को लखनऊ से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने उनसे खास बातचीत की। राजनीति में सौम्य कहे जाने वाले डॉ. दिनेश शर्मा ने भाजपा संगठन से लेकर प्रोफेसर, मेयर और अब उपराज्यपाल बनने के सफर को बताते हुए थोड़ा भावुक भी हुए। उन्होंने कहा- संगठन की वजह से युवा मोर्चा का 3 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बना। मेयर, डिप्टी सीएम, नेता सदन बना। अब संगठन यह कहने में कष्ट हो रहा है कि संगठन से इस्तीफा देना पड़ेगा। अभ पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल: नई जिम्मेदारी को किस तरह देखते हैं? जवाब: हर जिम्मेदारी अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आती है। मेरा प्रयास हमेशा रहा है कि चुनौती में अवसर तलाशा जाए। मैंने शिक्षक, शैक्षणिक, संगठन और कार्यपालिका से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। अब संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है तो इसे पूरी निष्ठा और संविधान के अनुरूप निभाना मेरी प्राथमिकता होगी। सवाल: आपके लंबे अनुभव का नई भूमिका में कितना फायदा मिलेगा? जवाब: संगठन में काम करने से लोगों के साथ सीधे जुड़ने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। लखनऊ नगर निगम में करीब 11 साल काम किया। शिक्षक रहा, फिर राजनीति में आया और कार्यपालिका की जिम्मेदारियां निभाईं। इन सभी अनुभवों ने मुझे अलग-अलग परिस्थितियों में काम करना सिखाया है। सवाल: जाति और संप्रदाय के आधार पर राजनीति को लेकर आपकी क्या सोच है? जवाब: मेरा मानना है कि देश को जाति और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर देखना चाहिए। प्रधानमंत्री का विजन समग्र भारत का है, जिसमें राष्ट्र सर्वोपरि है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ईडब्ल्यूएस जैसी व्यवस्था इसी दिशा में एक उदाहरण है। समाज को बांटने के बजाय सबको साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। सवाल: जेन-जी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: मैं लंबे समय तक विद्यार्थियों के बीच रहा हूं, इसलिए युवाओं की आकांक्षाओं को करीब से समझता हूं। आज की पीढ़ी के सवाल और अपेक्षाएं अलग हैं। शिक्षा, अवसर और भविष्य को लेकर युवाओं की चिंता को गंभीरता से समझना होगा। प्रधानमंत्री भी हर पीढ़ी और हर वर्ग के भविष्य को लेकर काम कर रहे हैं। मैं इसे राजनीतिक बहस के बजाय युवाओं की आकांक्षाओं के नजरिए से देखता हूं। सवाल: अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कहेंगे? जवाब: जो मामले न्यायालय के सामने हैं, उन पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। जांच और कार्रवाई भी हुई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आना चाहिए। श्रीराम को लेकर राजनीति करने वालों को जनता अपने स्तर पर जवाब देती है। सवाल: राज्यसभा से इस्तीफे और नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी? जवाब: मैं दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करूंगा। पार्टी और नेतृत्व की ओर से जो निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया होगी। राज्यसभा और संगठन से जुड़े दायित्वों के संबंध में भी नेतृत्व जो उचित समझेगा, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। लखनऊ से अंडमान तक के सफर सवाल-जवाब… सवाल: मेयर से उपमुख्यमंत्री और अब उपराज्यपाल तक के सफर में लखनऊ आपके लिए कितना महत्वपूर्ण रहा? जवाब: लखनऊ मेरे सार्वजनिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यहां के लोगों ने मुझे अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने का अवसर दिया। मेयर से लेकर उपमुख्यमंत्री तक के सफर में लखनऊ के लोगों और कार्यकर्ताओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यह रिश्ता पद से नहीं, भावनाओं से जुड़ा है। सवाल: दो बार मेयर रहे। उस दौर की कौन-सी उपलब्धि आज भी सबसे ज्यादा संतोष देती है? जवाब: मेयर रहते मेरा जोर शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने और लखनऊ को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर रहा। कई विकास कार्य उस समय शुरू हुए। मेरे लिए सबसे संतोष की बात यही है कि उन प्रयासों से शहर के विकास को एक दिशा मिली। सवाल: शिक्षक से राजनीति और फिर संवैधानिक पद तक पहुंचने में लखनऊ ने आपको क्या सिखाया? जवाब: लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के बीच रहने का अनुभव मिला। राजनीति में आने के बाद समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद हुआ। इस शहर ने मुझे विविधता के साथ काम करना और अलग-अलग विचारों को सुनना सिखाया। यही अनुभव आज भी मेरे लिए उपयोगी है। सवाल: अब अंडमान-निकोबार की जिम्मेदारी है। लखनऊ से आपका जुड़ाव कैसे बना रहेगा? जवाब: जिम्मेदारी का स्थान बदल सकता है, रिश्ते नहीं। लखनऊ मेरे जीवन का हिस्सा है। यहां के लोगों, कार्यकर्ताओं और मित्रों से वर्षों का जुड़ाव है। नई जिम्मेदारी के बावजूद यह संबंध कायम रहेगा। सवाल: आज के लखनऊ में विकास के साथ किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है? जवाब: लखनऊ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रैफिक, पर्यावरण, स्वच्छता, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं पर लगातार काम करना जरूरी है। शहर के विस्तार को देखते हुए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। सवाल: लखनऊ की तहजीब, साहित्य और खान-पान की कौन-सी चीजें अंडमान तक साथ जाएंगी? जवाब: लखनऊ की तहजीब उसकी सबसे बड़ी पहचान है। यहां की भाषा, अदब, साहित्य, खान-पान और लोगों का अपनापन लंबे समय तक साथ रहता है। अंडमान-निकोबार की नई जिम्मेदारी के साथ लखनऊ की ये यादें भी मेरे साथ रहेंगी। सवाल: लखनऊ की जनता और पुराने साथियों के लिए आपका संदेश क्या है? जवाब: यह मेरे सार्वजनिक जीवन में एक नई भूमिका है। अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने के बाद अब संवैधानिक पद पर सेवा का अवसर मिला है। इसे मैं सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं। लखनऊ ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया, उसे मैं हमेशा याद रखूंगा। मेयर से लेकर उपमुख्यमंत्री और अब उपराज्यपाल की जिम्मेदारी तक यहां के लोगों का सहयोग मेरे साथ रहा है। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मेरी जिम्मेदारी भले ही दूसरे स्थान पर हो, लेकिन लखनऊ से मेरा रिश्ता हमेशा बना रहेगा। ------------------- इसे भी पढ़िए… यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम बने अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल : डॉ. दिनेश शर्मा भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं, डीके जोशी की जगह लेंगे यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान में राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार का उपराज्यपाल बनाया गया है। उनका राज्यसभा का कार्यकाल अभी 2 महीने (नवंबर, 2026 तक) बाकी है। वह एडमिरल डीके जोशी (सेवानिवृत्त) की जगह लेंगे। डॉ. शर्मा ने उपराज्यपाल बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया है। (पूरी खबर पढ़िए)
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