Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    दुनिया को रिकॉर्ड तोड़ तेल बेच रहा भारत, रिलायंस ने किया बड़ा खेल!

    2 hours from now

    1

    0

    आज दुनिया की नजरें एक बार फिर भारत पर टिकी है। वजह है समुंदर के रास्ते तैरता हुआ ईंधन। जिसके बिना दुनिया की अर्थव्यवस्था का जो पहिया है वो थम सकता है। यानी कि डीजल की वजह से। एक तरफ पश्चिम एशिया में तनाव है और दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया भर में डीजल का भीषण संकट गहराया हुआ है। दूसरी तरफ भारत ने इस वैश्विक संकट के बीच में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। अक्टूबर के महीने में भारत का जो डीजल निर्यात है वो 13 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और अब भारत दुनिया में समुद्र के रास्ते डीजल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। भारत ने इस रेस में रूस जैसे बड़े एक्सपोर्टर को भी पीछे छोड़ दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री जब हाल ही में भारत आए थे तो उन्होंने भारत को रिफाइनिंग सुपर पावर करार दिया था और यही सुपर पावर अब अपनी ताकत दिखा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब देश अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है वो देश अचानक दुनिया का सबसे बड़ा डीजल सप्लायर कैसे बन गया और क्या इस भारी निर्यात से भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है। कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म कैप्लर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर के महीने में भारत ने 71 मिलियन बैरल पर डे डीजल निर्यात किया है। यह आंकड़ा पिछले महीने यानी कि सितंबर के मुकाबले 19.6% ज्यादा है। और अगर पिछले साल की अक्टूबर से हम इसकी तुलना करें तो यह 8.1% की बढ़त है। और इस पूरे एक्सपोर्ट के बड़े खेल में जो सबसे बड़ा खिलाड़ी दिखाई देता है वो निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री है।इसे भी पढ़ें: Trump प्रशासन के दबाव के बीच Ukraine का हमला, Rosneft की Samara रिफाइनरी बनी निशानाअक्टूबर में भारत ने जितना डीजल बाहर भेजा है उसका करीब 78% हिस्सा अकेले रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी से निकला है। रिलायंस अकेले 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल एक्सपोर्ट किया है। इसके अलावा जो सरकारी रिफाइनरियां हैं उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के ऊंचे मार्जिन का फायदा उठाया है। मंगल रिफाइनरी एमआरपीएल का निर्यात सितंबर के 1000 बैरल से उछलकर करीब 38,000 बैरल प्रतिदिन हो गया। वहीं इंडियन ऑयल का जो आंकड़ा है एक्सपोर्ट का वो भी 464% उछलकर करीब 53,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यानी कि भारत लगातार डीजल एक्सपोर्ट कर रहा है। अब समझिए कि आखिर अचानक भारतीय डीजल की इतनी मांग कहां से बढ़ गई? तो आपको बता दें कि इसके पीछे दो बड़े वैश्विक कारण है। पहला जो कारण है वो है रूस की रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डीजल निर्यातक देश रूस रहा है। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की प्रमुख रिफाइनरियों और बंदरगाहों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसका नतीजा यह हुआ कि रूस ने अपने ईंधन निर्यात में भारी कटौती की है और दूसरी जो वजह है वो है पश्चिम एशिया में तनाव। सप्लाई चेन में रुकावट है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष जारी है। क्रूड ऑयल और गैस का जो सामान्य प्रवाह था वह बाधित हो गया। डीजल केवल कारों में नहीं डलता है। लंबी दूरी के ट्रकों, भारी मशीनरी, खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और विशालकाय उद्योग। ये सारी जगहें डीजल की ताकत से चलती हैं। इसे भी पढ़ें: मोदी ने ठुकराया दोस्त पुतिन का ये ऑफर, सबक सिखाना जरूरी था!यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में जब सप्लाई की कमी हुई तो कीमतें आसमान छूने लगी। रिफाइनिंग मार्जिन यानी कि क्रूड ऑयल से डीजल बनाने का जो मुनाफा है वो सुपर नॉर्मल स्तर पर पहुंच गया। भारत के पास जामनगर जैसी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है जो 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही है। भारत ने तुरंत इस मौके को भुनाया और यूरोप से लेकर अफ्रीका और अमेरिका तक डीजल की आपूर्ति को शुरू कर दिया। इसलिए भारतीय डीजल एक्सपोर्ट इतना बढ़ा है। लेकिन यहां इस खबर का सबसे पेचीदा आर्थिक पहलू सामने आता है। जिसे समझना बहुत जरूरी होता है। बाहर से देखने में यह लगता है कि भारत तेल बेचकर बहुत सारा पैसा कमा रहा है। लेकिन यह बात आधी सच है क्योंकि सच यह है कि डीजल बनाने के लिए जो कच्चा तेल भारत खरीद रहा है, वह भी बहुत महंगे दामों पर आ रहा है। इसे भी पढ़ें: मोदी को हराने की तारीख बताने वाला 19 दिन बाद खुद ही निपट गया, जानें क्या हुआ?भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। ऑल pries.com के अनुसार भारत को क्रूड इंपोर्ट के लिए औसतन $123 प्रति बैरल तक की ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल जो था वो $90 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जो पिछले साल की इसी अवधि से $29 अरब डॉलर ज्यादा है। पहले भारत को रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल मिल रहा था। लेकिन अब वो डिस्काउंट लगभग खत्म हो चुका है और शिपिंग की जो लागत है वो भी बढ़ गई है। यानी कि कच्चा तेल भी महंगा हो गया है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    किंगमेकर मुस्लिमों की निकली हेकड़ी, नेतन्याहू दुश्मन के साथ मिल बनाएंगे सरकार!
    Next Article
    US- Iran Peace Draft | 7 दिनों में खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य, यूरेनियम समझौते पर चीन निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका, अमेरिका-ईरान शांति प्रस्ताव के ड्राफ्ट की मुख्य बातें

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment