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    देवरिया टीचर आत्महत्या मामले में बीएसए कार्यालय से फुटेज गायब:निलंबित बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी की संभावना, डीवीआर बदलने का संदेह

    2 hours ago

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    देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में जांच तेज हो गई है। गोरखपुर पुलिस की टीम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच की, जिसमें 20 फरवरी की फुटेज डीवीआर से गायब मिली। आशंका है कि संबंधित डीवीआर को बदला गया है। यह मामला देवरिया के गौरी बाजार विकासखंड के मदरसन गांव स्थित कृषक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। उनकी पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया है। सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने का संदेह जांच में सामने आया कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह बीएसए कार्यालय आए थे और उन्होंने बीएसए से मुलाकात की थी। इसके बाद बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा डीवीआर बदलने की बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालने पर केवल दो दिन पुरानी फुटेज ही मिली। इससे पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं थी, जिससे फुटेज जानबूझकर डिलीट किए जाने का संदेह गहरा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कार्यालय में डीवीआर किसने और कब बदला। मामले में डीवीआर से हार्डडिस्क गायब होने की भी चर्चा है। पुलिस संबंधित कर्मियों से पूछताछ कर रही है और तकनीकी साक्ष्य जुटाने का प्रयास कर रही है। इस प्रकरण में निलंबित बीएसए और एक लिपिक पर गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। निलंबित बीएसए और लिपिक पर कार्रवाई की तैयारी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह प्रकरण में आरोपों के बाद तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित किया जा चुका है। साथ ही लिपिक संजीव सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। दोनों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी बताई जा रही है। जिलास्तरीय और शासन स्तर की जांच समिति को पूर्व में जो सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई गई थी, उसमें कथित रूप से कृष्ण मोहन सिंह बीएसए कार्यालय में दिखाई दिए थे। चर्चा है कि वह किसी बात को लेकर हाथ जोड़ते नजर आए थे। उस समय जांच समिति फुटेज का बैकअप पेन ड्राइव में लेकर गई थी। पहले भी हार्डडिस्क बदलने के आरोप बीएसए कार्यालय में पहले भी बड़े मामलों के दौरान हार्डडिस्क बदलने की चर्चाएं सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार एक पूर्व बीएसए के कार्यकाल में भी एक विवादित प्रकरण के बाद डीवीआर की हार्डडिस्क बदले जाने की बात कही गई थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान मामले में भी डीवीआर से रिकॉर्डिंग गायब होना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गोरखपुर पुलिस अब तकनीकी जांच के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। यदि साक्ष्य मिटाने की पुष्टि होती है तो आईटी एक्ट व अन्य धाराओं में कार्रवाई संभव है।
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