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    धनंजय सिंह पर हमला, गवाह डॉक्टर-फार्मासिस्ट से जिरह आज:विधायक अभय-विनीत सिंह समेत कई नामजद, 24 साल पहले चली थी गोलियां

    1 hour ago

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    वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र में 24 साल पहले टकसाल सिनेमा के पास पूर्व सांसद धंनजय सिंह पर हुआ जानलेवा हमले का मामला फिर गरमा गया है। धनंजय सिंह पर हमले के आरोपियों में नामजद चार हमलावरों को गैंगस्टर केस में बरी होने के बाद मुख्य केस का ट्रायल तेज हो गया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह की ओर से दाखिल धारा 311 के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए बचाव पक्ष के प्ली ऑफ एलीबाई से जुड़े दो प्रमुख गवाहों को बुलाया है। इसमें डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाकर यादव को आज पुनः जिरह के लिए तलब किया है। बता दें कि एमपी एमएलए कोर्ट के सबसे पुराने केस में अब जजमेंट का इंतजार है। 2002 में दर्ज यह केस वर्ष 2003 से सत्र न्यायालय में परीक्षण को लंबित है। दोनों पक्षों का साक्ष्य वर्ष 2021 में पूरा हो चुका था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते अंतिम फैसला नहीं हो सका था। एमपीएमएलए कोर्ट वाराणसी के जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह आज 24 साल पुराने और शहर के बेहद चर्चित नदेसर टकसाल सिनेमा शूटआउट केस की सुनवाई करेंगे। केस में गवाही, जिरह और साक्ष्य के बाद फिर से नया मोड़ आ गया है। अब कोर्ट ने मेडिकल करने वाले डॉक्टर और फार्मासिस्ट को तलब किया है। अहम केस में की आज की तारीख पर सबकी नजर है और डॉक्टर और फ़ार्मासिस्ट से अभियोजन और आरोपियों के वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जिरह करेंगे। इसके लिए आरोपियों के वकील ने तकनीकि ऋुटि की बात कहते हुए दोनों को कोर्ट बुलाने और फिर से जिरह करने की मांग की थी। 24 साल से लंबित मामला, अदालत ने दिखाई सख्ती हाईकोर्ट ने धारा 482, संख्या 30523/2012 में 6 नवंबर 2012 को निर्देश दिया था कि जब तक सत्र परीक्षण संख्या 461/2003 का निस्तारण नहीं होता, तब तक इस मामले में निर्णय न दिया जाए। अब उस केस में 29 अगस्त 2025 को फैसला हो जाने के बाद इस प्रकरण में फिर से बहस की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा है कि “यह न्यायालय का सबसे प्राचीनतम लंबित मामलों में शामिल है, अतः साक्षियों की जिरह अब किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।” अदालत ने मूल चिकित्सीय अभिलेख तलब करने की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन दोनों गवाहों की पुनः जिरह की अनुमति दे दी। क्यों अहम है डॉक्टर और फार्मासिस्ट की जिरह? बचाव पक्ष का दावा है कि घटना के समय अभियुक्त अभय सिंह और संदीप सिंह लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। इसी आधार पर उन्होंने प्ली ऑफ एलीबाई (घटनास्थल पर मौजूद न होने का दावा) लिया था। अब इलाज से जुड़े डॉक्टर और फार्मासिस्ट से दोबारा जिरह कर इस दावे की सत्यता की पड़ताल की जाएगी। करीब ढाई दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल शूटआउट केस में अब सुनवाई की रफ्तार तेज हो गई है। आज 12 फरवरी 2026 को होने वाली जिरह इस बात को तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है कि प्ली ऑफ एलीबाई वास्तविक या केवल बचाव की रणनीति है। क्या है पूरा मामला? 4 अक्टूबर 2002 को तत्कालीन विधायक और पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी वाहन से जौनपुर लौट रहे थे। इसी दौरान वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास बोलेरो से उतरे अभय सिंह और उनके 4–5 साथियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर, चालक समेत कई लोग घायल हो गए। इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को मलदहिया स्थित सिंह मेडिकल में भर्ती कराया गया, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने मामले की जांच की तो घटना सही पाई गई। बाद में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने गोसाईगंज के बाहुबली विधायक अभय सिंह, बाहुबली एमएलसी विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं इस घटना के बाद पुलिस ने संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। 29 अगस्त 2025 को गैंगस्टर में बरी हुए आरोपी अपर जिला जज (13) सुशील खरवार की अदालत ने शुक्रवार को गैंगस्टर एक्ट मामले में आरोपी संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वर्ष 2002 में कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर में केराकत विधायक धनंजय सिंह पर जानलेवा हमले मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ कैंट थाने में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज हुआ था। पूर्व सांसद ने बताया छात्र जीवन से रंजिश धनंजय सिंह ने तहरीर में कहा कि अभय से छात्र जीवन से ही रंजिश है कई बार मरने की कोशिश कर चुका है। अभय व उसके साथियों को पहचाना है। सामने देखकर पहचानने की बात कहीं, आरोप लगाया कि अभय सिंह का यूपी में आतंक है। व्यापारियों से रंगदारी वसूलता है। भाड़े पर हत्या करता व करवाता है, घटनास्थल पर मौजूद पुलिसवालों ने सिंह मेडिकल रिसर्च सेंटर में भर्ती करवाया, इस मामले में ग्राम बसका सिकरारा जौनपुर निवासी धनंजय सिंह कि तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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