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    धोती- कुर्ता पहनकर छात्रों ने खेला बैडमिंटन:संस्कृत में की गई कमेंट्री, वाराणसी के संपूर्णानंद विवि में खेलकूद महात्सव

    3 hours ago

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    संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित वार्षिक अन्तर्संकाय खेलकूद युवा महोत्सव प्रतियोगिता का शनिवार को समापन हुआ। 11 फरवरी से आयोजित चार दिवसीय इस आयोजन में खास बात यह रही है कि खिलाड़ी पारंपरिक पीले धौतवस्त्र एवं पारंपरिक वेशभूषा में थे और समस्त गतिविधियों की उद्घोषणा यानी कमेंट्री संस्कृत भाषा में की गई। जिससे वातावरण बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक हो गया। इस प्रतियोगिता में (महिला) किरन यादव प्रथम, अर्चना मौर्या द्वितीय व निधि गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं। इसी तरह पुरुष बैडमिंटन में रोहित मिश्रा प्रथम, द्वितीय शिवेंद्रधर द्विवेदी व अंश तिवारी तीसरे नंबर पर रहे। तनाव कम करने व अनुशासन में रहना सिखाता है खेल आयोजन शारीरिक शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग के सचिव एवं प्रभारी डॉ. सत्येंद्र कुमार यादव के संयोजकत्व में हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से बैडमिंटन से शरीर सुदृढ़ होता है, सहनशक्ति बढ़ती है, एकाग्रता एवं निर्णय क्षमता विकसित होती है तथा आत्मविश्वास और धैर्य का निर्माण होता है। साथ ही, यह खेल तनाव कम करने एवं अनुशासन, टीम भावना व सहयोग जैसे सामाजिक गुणों के विकास में सहायक है। खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग : कुलपति कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। संस्कृत माध्यम से खेलों का संचालन एवं उद्घोषणा करना देववाणी को जनभाषा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, सहकार्य एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होता है, जो उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होता है। प्रतियोगिता में संस्कृत उद्घोषक वेद विभाग के शोध छात्र यज्ञ नारायण रहे। साथ ही खेल प्रशिक्षक आदित्य कुमार एवं सोमनाथ पांडेय के सहयोग से आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृत भाषा एवं खेल संस्कृति से युक्त ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने का संकल्प व्यक्त किया। यह आयोजन विश्वविद्यालय में शिक्षा, संस्कृति और खेल के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा। खेल प्रशिक्षक आदित्य कुमार ने खेल प्रतियोगिता का प्रबंधन किया।
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