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    US-Israel हमले में Khamenei की मौत के बाद ईरान में Power Shift, नए नेता पर लगी मुहर

    18 hours ago

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    ईरान में सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला होने की खबर सामने आई है। देश के सर्वोच्च धार्मिक निकाय विशेषज्ञों की सभा ने नए सर्वोच्च नेता के चयन पर सहमति बना ली है, हालांकि चुने गए व्यक्ति का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस निर्णय की पुष्टि सभा के कुछ सदस्यों ने की है।ईरान की समाचार एजेंसियों के मुताबिक खुज़ेस्तान प्रांत का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य मोहसिन हैदरी ने बताया है कि विशेषज्ञों की सभा के बहुमत ने सबसे उपयुक्त उम्मीदवार को चुन लिया है। वहीं सभा के एक अन्य सदस्य मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी ने भी कहा है कि परिषद के भीतर बहुमत की राय से एक ठोस निर्णय लिया जा चुका है।बता दें कि विशेषज्ञों की सभा ईरान में सर्वोच्च नेता की नियुक्ति करने वाली संवैधानिक संस्था है। यह देश की सबसे शक्तिशाली पदवी मानी जाती है, जिसके पास सेना, न्याय व्यवस्था और कई प्रमुख सरकारी संस्थानों पर अंतिम अधिकार होता है।गौरतलब है कि यह फैसला उस समय सामने आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हाल ही में मौत हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में उनकी मौत हुई थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों के बाद खामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए इसे ईरान और अमेरिका के लोगों के लिए न्याय बताया था। इस घटना के बाद क्षेत्रीय हालात काफी संवेदनशील हो गए हैं और कई देशों ने चिंता भी जताई है।बताया जा रहा है कि 86 वर्षीय खामेनेई वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने इस पद पर इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद जिम्मेदारी संभाली थी। गौरतलब है कि वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह पद ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।मौजूद जानकारी के अनुसार नए सर्वोच्च नेता के औपचारिक रूप से पद संभालने तक देश में एक अस्थायी व्यवस्था बनाई गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी एजई और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस संक्रमण काल की निगरानी कर रहे हैं।बता दें कि ईरान के संविधान के अनुसार 88 सदस्यों वाली विशेषज्ञों की सभा को ही सर्वोच्च नेता चुनने का अधिकार है। इस सभा के सदस्य शिया धर्मगुरु होते हैं जिन्हें जनता द्वारा हर आठ वर्ष में चुना जाता है, हालांकि उम्मीदवारों को पहले संरक्षक परिषद की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है।कानून के मुताबिक किसी सर्वोच्च नेता के निधन के बाद विशेषज्ञों की सभा को जल्द से जल्द नए नेता का चयन करना होता है। अगर प्रक्रिया में समय लगता है तो वरिष्ठ अधिकारियों की एक अस्थायी परिषद सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां संभाल सकती है।मौजूदा समय में यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे दौर में हो रहा है जब क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले भी किए हैं। ऐसे में नया नेतृत्व आने वाले समय में देश की विदेश नीति और क्षेत्रीय हालात पर अहम असर डाल सकता है।गौरतलब है कि वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक ईरान में केवल दो ही सर्वोच्च नेता हुए हैं। ऐसे में मौजूदा नेतृत्व परिवर्तन को देश के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
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