Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    उद्घाटन से पहले ग्रीन कॉरिडोर की हरियाली सूखी:साज-सज्जा पर खर्च लाखों, लोकल फल विक्रेता बोले- कभी ना तो कोई पानी डालता, ना देखते ही आता

    21 hours ago

    1

    0

    लखनऊ में गोमतीनगर से निशातगंज होते हुए हनुमान सेतु तक बन रहे ग्रीन कॉरिडोर को शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की बड़ी परियोजना बताया जा रहा है, लेकिन इसके उद्घाटन से पहले ही इसकी साज-सज्जा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉरिडोर को सुंदर बनाने के लिए सड़क के बीच डिवाइडर में बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से अधिकतर पौधे अब पूरी तरह सूख चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधे लगाए तो गए, लेकिन उनकी देखभाल या सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई। करीब 4-5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, लाखों लोगों को राहत का दावा गोमतीनगर के समतामूलक चौराहे से निशातगंज होते हुए हनुमान सेतु तक बनने वाला यह ग्रीन कॉरिडोर करीब 4 से 5 किलोमीटर लंबा है। अधिकारियों के मुताबिक इसके शुरू होने के बाद गोमतीनगर से हनुमान सेतु की दूरी महज पांच मिनट में तय की जा सकेगी। इससे रोजाना एक लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलने का दावा किया जा रहा है। गोमतीनगर, विभूतिखंड, विराटखंड, विनयखंड, निशातगंज, डालीगंज, हजरतगंज और हनुमान सेतु क्षेत्र के लोगों को इससे सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है। निर्माण के अंतिम चरण के काम पूरे होने के बाद जल्द ही इसका लोकार्पण किए जाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा-पौधे लगाए, लेकिन पानी देने कोई नहीं आया हनुमान मंदिर के पास फल का ठेला लगाकर रोजी-रोटी चलाने वाले राजेंद्र बताते हैं कि वह पिछले करीब 25 सालों से इसी सड़क किनारे ठेला लगा रहे हैं। उनके मुताबिक करीब दस दिन पहले यहां पौधे लगाए गए थे, लेकिन उसके बाद किसी को उनकी देखभाल करते नहीं देखा गया। राजेंद्र कहते हैं, “हम रोज यहीं रहते हैं, लेकिन हमने कभी किसी को इन पौधों में पानी डालते नहीं देखा। हो सकता है हमारे जाने के बाद कोई आता हो, लेकिन हमें तो ऐसा कभी नजर नहीं आया।” दूसरे दुकानदार भी उठा रहे सवाल वहीं दूसरे फल विक्रेता चंद्रभान का भी कहना है कि वह कई सालों से इसी इलाके में फल का ठेला लगाते हैं। उनके मुताबिक जब पौधे लगाए गए थे तब वे पूरी तरह हरे-भरे थे, लेकिन देखभाल न होने के कारण जल्दी ही सूख गए। चंद्रभान कहते हैं, “जब पौधे लगाए गए थे तब अच्छे दिख रहे थे, लेकिन कोई पानी नहीं डालता। इसी वजह से अब ज्यादातर पौधे सूख गए हैं।”
    Click here to Read more
    Prev Article
    हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिले शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा:चंडीगढ़ में हुई शिष्टाचार भेंट, जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
    Next Article
    लिंक एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण, दरें निर्धारित:शहरी क्षेत्र में दो गुना, ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मुआवजा मिलेगा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment