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    Vanakkam Poorvottar: अचानक Siliguri Corridor पहुँचे Army Chief General Dhiraj Seth, Chicken Neck पर भारत कर रहा बड़ी तैयारी

    9 hours ago

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    भारत ने अपने सबसे संवेदनशील सामरिक क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' को अभेद्य सुरक्षा कवच में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिए हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का पूर्वी कमान के अहम सैन्य ठिकानों, विशेषकर बेंगडुबी मिलिट्री स्टेशन और नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) का दौरा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल सीमाओं की निगरानी नहीं, बल्कि किसी भी दुस्साहस का करारा और त्वरित जवाब देने की पूरी तैयारी कर चुका है। पूर्वोत्तर की सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व गति से मजबूत किया जा रहा है, ताकि देश की इस जीवनरेखा की ओर उठने वाली हर चुनौती का जवाब उसी की भाषा में दिया जा सके।हम आपको बता दें कि बेंगडुबी मिलिट्री स्टेशन का महत्व इसलिए असाधारण है क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थित है। यही वह संकरा भू-भाग है जिसे सामरिक भाषा में भारत का 'चिकन नेक' कहा जाता है। नेपाल और बांग्लादेश के बीच स्थित यह कॉरिडोर अपने सबसे संकरे हिस्से में 20 किलोमीटर से भी कम चौड़ा है। यही एकमात्र सड़क और रेल संपर्क है जो भारत के मुख्य भूभाग को असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। यदि किसी संघर्ष या बड़े संकट के दौरान यह संपर्क बाधित होता है तो पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की रसद, सैन्य सहायता और नागरिक आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: Agnipath Scheme को लेकर जल्द मिलेगी बड़ी खुशखबरी ! Agniveers First Batch को लेकर तीनों सेनाओं ने दे दिया बड़ा संकेतइसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार इस पूरे क्षेत्र में रक्षा और परिवहन अवसंरचना को युद्धस्तर पर मजबूत कर रही है। भारतीय रेलवे ने हाल ही में 35 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेल लाइन बनाने की योजना की घोषणा की है। इस परियोजना का उद्देश्य युद्ध, आतंकी हमले या किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की स्थिति में सैन्य साजो-सामान और नागरिक आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है। भूमिगत रेल संपर्क भविष्य के किसी भी संघर्ष में भारत की रणनीतिक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।सिर्फ रेलवे ही नहीं, बल्कि सड़क नेटवर्क को भी नई मजबूती दी जा रही है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों को तेज गति से विकसित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया है। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को 120 एकड़ से अधिक भूमि हस्तांतरित की गई है, जिससे निगरानी क्षमता बढ़ेगी और सैनिकों की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।इस पूरे सुरक्षा ढांचे में बागडोगरा हवाई अड्डा और हासीमारा वायुसेना स्टेशन की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। हम आपको बता दें कि हासीमारा एयरबेस भारतीय वायुसेना के 101 स्क्वाड्रन का ठिकाना है, जहां देश के दो परिचालन रॉफेल स्क्वॉड्रनों में से एक तैनात है। इसका अर्थ यह है कि पूर्वी क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति या सैन्य चुनौती का जवाब अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सटीक और प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है।अपने दौरे के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को पूर्वी कमान के परिचालन क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों, सैनिकों की तैनाती और आधुनिक निगरानी प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने तकनीक के अधिकाधिक उपयोग, सैन्य क्षमताओं के विस्तार और सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय सेना अब केवल पारंपरिक युद्ध की तैयारी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नेटवर्क-केंद्रित युद्ध, आधुनिक निगरानी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है।हम आपको यह भी बता दें कि सेना प्रमुख ने नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) का भी दौरा किया, जहां उन्हें बदलते सुरक्षा परिदृश्य, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और युद्धक तैयारियों को और प्रभावी बनाने के उपायों की जानकारी दी गई। इसी दौरान उन्होंने भारतीय सेना के लिए अपना नया विजन 'VIJAY' प्रस्तुत किया। देखा जाये तो यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य सोच का खाका है। 'VIJAY' का अर्थ है—Vigilance (सतर्कता), Innovation (नवाचार), Jointness (संयुक्तता), Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता) और Yodha First (योद्धा सर्वोपरि)। सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इन्हीं पांच सिद्धांतों पर आगे बढ़कर भारतीय सेना अधिक चुस्त, अनुकूलनशील और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बनेगी।हम आपको यह भी बता दें कि कि सेना प्रमुख बनने के बाद यह उनका दूसरा अग्रिम क्षेत्र का दौरा है। इससे पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी-सुंदरबनी सेक्टर में 16 कोर (व्हाइट नाइट कोर) की अग्रिम चौकियों का निरीक्षण किया था। इससे स्पष्ट है कि सेना नेतृत्व पश्चिमी और पूर्वी—दोनों मोर्चों पर समान रूप से सुरक्षा तैयारियों का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।सामरिक दृष्टि से देखें तो सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा केवल एक सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और पूर्वोत्तर राज्यों से उसके भौगोलिक एवं रणनीतिक संपर्क की सुरक्षा है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पूर्वोत्तर में संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियां और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस कॉरिडोर का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में सड़क, रेल, वायुसेना, सीमा सुरक्षा और आधुनिक सैन्य तकनीक को एकीकृत करते हुए भारत जिस बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे का निर्माण कर रहा है, वह केवल वर्तमान चुनौतियों का जवाब नहीं, बल्कि भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए भी एक मजबूत रणनीतिक निवेश है। सेना प्रमुख का यह दौरा इसी व्यापक संदेश को रेखांकित करता है कि भारत अब अपने सबसे संवेदनशील भू-भाग की सुरक्षा को किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता।
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