Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Vanakkam Poorvottar: Assam में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने और घुसपैठियों को बांग्लादेश भगाने का अभियान जारी

    3 hours from now

    1

    0

    असम में दो समानांतर कार्रवाइयों ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की नीतियों को एक बार फिर देशव्यापी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान, दूसरी तरफ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ पर त्वरित कार्रवाई। यह दोनों कार्रवाई दर्शाती हैं कि राज्य सरकार घुसपैठ और अतिक्रमण के खिलाफ अपने तेवर सख्त रखे हुए है। इस बारे में खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया है कि श्रीभूमि जिले में व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर 880 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस जमीन को अब दोबारा वन और हरियाली के लिए तैयार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसे मिशन पूरा होने जैसा बताते हुए साफ कहा कि जहां भी वन या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मिलेगा, सरकार खुद आगे बढ़कर कार्रवाई करेगी। हम आपको बता दें कि श्रीभूमि में यह अभियान उस समय हुआ जब पास के हाइलाकांडी जिले में भी इसी तरह की कार्रवाई हाल ही में की गई थी। वन विभाग ने पाथरकांडी क्षेत्र के आरक्षित वन इलाके में रह रहे करीब 1000 परिवारों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने का निर्देश दिया था। इशारपार, माधबपुर, बालिया, मधुरबंद, चागलमोया, मगुरा और जोगीसोरा जैसे गांवों में नोटिस बांटे गए। समय सीमा मिलते ही कई परिवारों ने अपने घर खुद तोड़ने शुरू किए और दूसरी जगह जाने की तैयारी की।इसे भी पढ़ें: Assam में Indian Air Force का शक्ति प्रदर्शन, Moran हाईवे बना Runway, PM Modi करेंगे उद्घाटनहालांकि अनेक परिवारों का कहना है कि वह दशकों से वहां रह रहे थे और पहले कभी प्रशासन ने आपत्ति नहीं जताई। उनका यह भी कहना है कि उनके पास न तो दूसरी जमीन है और न ही पक्का पुनर्वास इंतजाम। प्रभावित लोगों ने सरकार से अपील की है कि मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाए।इसके साथ ही असम सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी सख्त रुख दिखाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि तड़के अभियान चलाकर 16 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें सीमा पार वापस भेजा गया। इससे करीब एक सप्ताह पहले 15 और लोगों को वापस भेजा गया था। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि असम के लिए इंतजार करना विकल्प नहीं, निर्णायक कदम ही रास्ता है। उनके अनुसार राज्य ने जीरो टोलरेंस नीति अपनाई है और मातृभूमि की रक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है। असम में सीमा इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है और सुरक्षा एजेंसियां तथा पुलिस मिलकर काम कर रही हैं। राज्य सरकार का कहना है कि सारी कार्रवाई कानून के दायरे में और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। साफ संकेत है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।देखा जाये तो असम आज एक चौराहे पर खड़ा है। एक रास्ता है ढिलाई, वोट बैंक और आंख मूंद लेने की राजनीति का। दूसरा रास्ता है सख्त फैसलों का, चाहे वे अलोकप्रिय ही क्यों न हों। हिमंत बिस्व सरमा ने साफ कर दिया है कि वे दूसरा रास्ता चुन चुके हैं। वन भूमि पर अतिक्रमण कोई छोटी समस्या नहीं। यह पर्यावरण, जल स्रोत, वन्य जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। अगर आज 880 हेक्टेयर जमीन वापस मिलती है तो इसका मतलब है कि कल बाढ़, कटाव और जल संकट से कुछ राहत मिल सकती है। इस नजरिए से देखें तो अभियान जरूरी था।जहां तक अवैध घुसपैठ का सवाल है, यह सच है कि सीमा वाले राज्य के लिए यह केवल कानून का नहीं, पहचान और संसाधनों का भी मुद्दा है। लगातार घुसपैठ से जनसांख्यिकी, जमीन और रोजगार पर असर पड़ता है। इस पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    ट्रेड डील से कश्मीरी सेब बागानों पर मंडराया खतरा! Omar Abdullah बोले- अमेरिकी सेब आने से घटेगी कश्मीरी सेबों की माँग
    Next Article
    भारत-Canada रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली? Ajit Doval के दौरे के बाद Security पर हुआ बड़ा फैसला

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment