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    विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक का किया विरोध:भाजपा उपाध्यक्ष कमलावती सिंह ने साधा निशाना, बताया विश्वासघात

    3 hours ago

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    फर्रुखाबाद में सोमवार को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष कमलावती सिंह ने फतेहगढ़ की ऑफिसर्स कॉलोनी में एक प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का जिक्र किया कि नीति निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। कमलावती सिंह ने चेतावनी दी कि जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनाव में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने विपक्ष के दावों को बेनकाब करते हुए स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत, दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। कमलावती सिंह ने समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे कोटा के भीतर धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना मात्र बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की इस साजिश में समाजवादी पार्टी ने धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर एक खतरनाक कदम उठाया है, जबकि भारत का संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने टीएमसी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी ने अपने राज्य में महिलाओं की आवाज को हिंसा के जरिए दबाया है, वही संसद में लोकतंत्र की बात कर रही है। भाजपा उपाध्यक्ष ने जोर दिया कि विपक्षी दल इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन सीधे परिसीमन से जुड़ा है। परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी है। उन्होंने कांग्रेस पर दशकों तक तकनीकी बहानों, समितियों और खोखली बहसों के माध्यम से महिला आरक्षण को लंबित रखने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी पिछड़े वर्गों को अधिकार देने की बात आई, कांग्रेस ने आयोग की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पंचायत में महिलाओं को आरक्षण देना उनके लिए आसान था क्योंकि वहां उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति प्रभावित नहीं होती थी लेकिन संसद में उन्होंने दरवाजे बंद रखें। परिसीमन का उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि जनसंख्या के अनुपात में संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
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