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    वाराणसी में निजीकरण-श्रमकानून का विरोध:बिजली कर्मचारी भिखारीपुर कार्यालय में प्रदर्शन करेंगे, कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों का समर्थन

    3 hours ago

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    बिजलीकर्मी इलेक्ट्रीसिटी अमेंडमेंट बिल 2026, बिजली के निजीकरण एवं श्रम कानूनों को खत्म करने के विरोध में आज विद्युत विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। लाइनमैन से लेकर अभियंता तक के कर्मचारी अपनी मांगों की आवाज बुलंद करेंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं की तरह बनारस के बिजली कर्मी भी विरोध में रहेंगे। सैकड़ों कर्मचारी भिखारीपुर स्थित हनुमानजी मंदिर पर कल लंच ऑवर में दोपहर 1 बजे से व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। विद्युत विभाग के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को संयुक्त मंच के तहत कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों का समर्थन मिला है। जिनमें इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, सीसीटीयू, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ तथा यूटीयूसी शामिल हैं। सभी बिजली कर्मचारी बजे पहुंचेंगे संघर्ष समिति के सचिव अंकुर पाण्डेय ने बताया कि आज बनारस के कज्जाकपुरा, पहड़िया, इमिलियाघाट, चिरईगांव आदि कार्यालयों के बिजलीकर्मियों का प्रदर्शन दिखेगा। सभी बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता मध्याह्न 12 बजे भिखारीपुर पहुंचेंगे। निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने , संविदा कर्मियों की छटनी बन्द कर उन्हें नियमित करने और पुराने पेंशन बहाली को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने तथा पावर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर हो रही हड़ताल की एक प्रमुख मांग यह है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय। मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया है। बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी से 12 फरवरी की हड़ताल स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई में से एक होगी। इंजीनियर मायाशंकर तिवारी ने कहा कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। हड़ताल की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक लगाना, नियमित पदों पर सीधी भर्ती करना तथा आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण भी शामिल है। संघर्ष समिति ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण (वितरण, उत्पादन और टीबीसीबी के जरिए ट्रांसमिशन) गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 तथा उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल वापस लिया जाना आवश्यक है।
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