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    वाराणसी में सात दिन के शोक का ऐलान:इमाम-ए-जुमा ने वापस लिया एहतेजाज का एलान, घरों में दुआख्वानी करने की अपील

    5 hours ago

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    ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनई की मौत के बाद शिया मुसलमान इजरायल और अमेरिका के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में वाराणसी में शिया समुदाय के लोगों में गम और गुस्सा देखने को मिल रहा है। इसी के तहत दफतर-ए-जुमा से इमाम-ए-जुमा शहर बनारस मौलाना जफर हुसैनी ने लोगों से अपील की है कि वो एक हफ्ते तक शोक मनाएं। घरों में काला परचम लगाएं और कला कपड़ा पहनें। इसके अलावा सोमवार सुबह 11 बजे लॉट सरेया स्थित सदर इमामबाड़े में पहुंचने का आह्वान किया था। जिसे वापस ले लिया गया है। इस बात की जानकारी सदर इमामबाड़े के केयर टेकर शामिल रिजवी ने दी है। शासन के निर्देश पर नहीं हो सकी शोक सभा सदर इमामबड़ा, लाट सरैया में एहतेजाजी जैसे का आज सुबह 11 बजे एलान किया गया था। जिसे प्रशासन से बातचीत के बाद इमाम ए जुमा बनारस ने वापस ले लिया है। सदर इमामबड़े पर किसी भी प्रकार का आयोजन नहीं होगा इस बात की जानकारी वहां के केयर टेकर शामिल रिजवी ने दी। उन्होंने बताया कि चौकी इंचार्ज सरैया आये थे। उन्होंने पुलिस और शासन की मंशा से अवगत कराया जिसके बाद इस जलसे को मुल्तवी कर दिया गया है। शामिल रिजवी ने कहा - हमारे रहबर की शाहदत से हम सभी गमजदा हैं। ऐसे में सभी से अपील है कि अपने-अपने घरों में जितना जयदा हो सके दुआ करें। इसके अलावा रोजे रख कर अल्लाह की बारगाह में दुश्मनों के खात्मे की दुआख्वानी की जाए। शिया कौम पर टूटा पहाड़ इमाम ए जुमा मौलाना जफ़र हुसैनी ने लेटर जारी करते हुए कहा- आज हम सभी पर गमों का पहाड़ टूटा है। हमारे रहबर आयतुल्लाह खामेनई जो इमामे जमाना के उनके नाएब थे उनकी बारगाह में अमेरिका और इजरायल की बर्बरियतों और दरिंदिगी का निशाना बनकर हमारे दरमियान से रुखसत हो गए। हमें इसका बहुत अफसोस है। पूरे शहर के शिया गमजदा हैं और अपने रहबर का गम मना रहे हैं। कर्बला न होती तो हम बेमौत मर जाते मौलाना जफर हुसैनी ने कहा- अगर हमारे सामने कर्बला का वाक्या नहीं होता तो आज हम सभी बेमौत मर जाते। मगर आपने कर्बला की विरासत पाई और इस्लामो शरीयत के लिए कुरआन ओ अहलेबैत (अ०) की मुहब्बत में जामे शहादत नोश फ़रमाया और अपनी दिली आरजू को पहुंचे। बदनसीब तो हम हैं जो आपके बाद भी जिंदा हैं सात दिन के शोक का किया एलान मौलाना ने मोमिनीने बनारस से अपील करते हुए कहा कि- इस बड़ी घटना का बहुत वसी पैमाने पर मुत्तहिदा तौर पर सोग मनाया जाये। दुकानें और कारोबार बंद रखे जाएं। सब लोग कला लेबास पहनें। घरों और मुहल्लों में काला परचम। काला अलम और काला बैनर लगाये जाएं और एक हफ्ते तक मुसलसल सोग(शोक) का माहौल रखा जाये। मजालिसे की जायें और पूरे वजूद से गमो अलम का मुजाहिरा करके अपने हुसैनी होने का सबूत पेश किया जाये। सभी मातमी अंजुमनों से आज सदर इमामबाड़ा पहुंचने का एलान मौलाना जफर हुसैनी ने इसके अलावा शहर के तमाम मोमिनीन और मातमी अन्जुमनें अलमे मुबारक, स्याह परचम और स्याह बैनर वगैरह के साथ जुलूस की शक्ल में 11 बजे दिन में लाट सरैया स्थित सदर इमामबाड़े में आने की बात कही। यहां नमाज ए जोहर से पहले जलसा ए अजा और मजलिसे अजा कराई जाएगी।
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