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    वाराणसी मंडी में भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा में उठा:सपा विधायक रागिनी सोनकर ने लगाए आरोप, मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां

    10 hours ago

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की मंडी में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गुरुवार को विधानसभा में तीखी बहस हुई। समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने विभागीय भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, जिस पर मंत्री ने अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं। विधायक सोनकर ने मंत्री से सीधा सवाल किया कि जब मंडी और सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी विभाग की है, तो करोड़ों रुपये के कथित घोटाले पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 लाख रुपये की लागत वाले सड़क कार्य के लिए 3 करोड़ 74 लाख रुपये का भुगतान किया गया। डॉ. सोनकर ने यह भी बताया कि 35 वर्ष पुरानी चारदीवारी को नया निर्माण दिखाकर भुगतान कराया गया। उपनिदेशक कार्यालय में फॉल्स सीलिंग के नाम पर 40 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि वास्तविक कार्य केवल 2 लाख 84 हजार रुपये का था। इसी तरह, चिनाई कार्य में 11 लाख के स्थान पर 25 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि बार-बार जांच और ब्लैकलिस्टिंग के बावजूद उन्हीं लोगों को दोबारा कार्य दिया जाना गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है। विधायक ने संबंधित जांच समिति के दस्तावेज सदन की मेज पर रखने की मांग की। इसके अतिरिक्त, डॉ. सोनकर ने छोटे व्यापारियों पर लगाए गए नए कर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नींबू, अदरक, लहसुन और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं के व्यापारियों से माल के प्रदेश में प्रवेश करते ही कर वसूला जा रहा है, जबकि पड़ोसी राज्यों में ऐसा प्रावधान नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वह इस कर को वापस लेने पर विचार करेगी। मंत्री ने अपने जवाब में विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और सड़कों की मरम्मत का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विपक्षी क्षेत्रों में 283 करोड़ रुपये से कार्य कराए गए हैं, और भाजपा तथा एनडीए विधायकों की मांग पर 1200 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण कराया गया है। मंत्री ने आरोपों का सीधा जवाब देने के बजाय अपनी उपलब्धियां गिनानी शुरू कर दीं। हालांकि, विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका मूल प्रश्न विभाग में कथित भ्रष्टाचार और जवाबदेही से जुड़ा है, जबकि मंत्री द्वारा उपलब्धियों का विवरण दिया गया। सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली और मामले की निष्पक्ष जांच तथा पारदर्शी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ती रही।
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