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    विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?

    14 hours ago

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    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया के दौरे पर रहने वाले हैं। जिनपिंग के इस दौरे और प्योंगयांग में उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन से उनकी होने वाली मुलाकात पर इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। ये दोनों नेता पिछले साल ही बीजिंग में मिले थे, जब चीनी सेना ने एक बहुत बड़ी परेड का आयोजन किया था। लेकिन इस बार खास बात यह है कि खुद शी जिनपिंग उत्तर कोरिया जा रहे हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपने विदेशी दौरे बहुत कम कर दिए हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आए थे, लेकिन 2019 के बाद यह पहली बार है जब चीनी राष्ट्रपति खुद प्योंगयांग जा रहे हैं।क्यों बेहद खास है जिनपिंग का यह दौरा?'अल जजीरा' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट विलियम यांग का कहना है कि जिनपिंग अब ज्यादा विदेश यात्राएं नहीं करते हैं। आज के समय में यह एक ट्रेंड बन गया है कि दुनिया भर के बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आते हैं। ऐसे में शी जिनपिंग का खुद चलकर उत्तर कोरिया जाना यह दिखाता है कि चीन इस यात्रा को कितनी ज्यादा अहमियत दे रहा है। आंकड़ों की मानें तो साल 2013 से 2019 के बीच जिनपिंग हर साल औसतन 14 विदेशी दौरे करते थे, लेकिन 2022 से 2025 के बीच यह संख्या घटकर हर साल सिर्फ छह रह गई है। इसे भी पढ़ें: नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया पर Kalapani-Lipulekh पर चेताया भीचीन और उत्तर कोरिया के रिश्तेअगर पारंपरिक रूप से देखें, तो चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में हमेशा से चीन का पलड़ा भारी रहा है। अमेरिका की एक संस्था 'नेशनल कमिटी ऑन नॉर्थ कोरिया' के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया अपने बिजनेस और व्यापार के लिए 95 परसेंट तक अकेले चीन पर निर्भर था। लेकिन साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब इस पूरे इलाके के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Ohio Festival में गोलियों की तड़तड़ाहट से जश्न बना मातम, Gun Violence में 12 लोग बुरी तरह घायलरूस के करीब आ रहा है उत्तर कोरियायूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस की खुलकर मदद की है। उसने रूस को बड़े पैमाने पर खतरनाक हथियार, तोपें और अपने सैनिक तक उपलब्ध कराए हैं, जिससे रूस को इस युद्ध में काफी मदद मिली है। साल 2023 के बाद से मॉस्को ने सैनिकों की तैनाती, तोपखाने, गोले और बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदने के बदले उत्तर कोरिया को करीब 14.4 अरब डॉलर का भारी-भरकम भुगतान किया है। यही वजह है कि अब इस क्षेत्र की राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
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