Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Women's Reservation पर Congress का सरकार पर दबाव, 2029 से लागू करने को All-Party Meeting बुलाएं

    3 hours from now

    1

    0

    कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान थमने के बाद अब सरकार को महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के बारे में चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने व्यक्तिगत राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं का उपयोग करने के बजाय उन्हें न्याय प्रदान करना चाहिए। मुख्य विपक्षी दल ने महिला आरक्षण के विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे एवं अंतिम चरण के मतदान के लिए प्रचार थमने के बाद एक बार फिर उठाई है। उसने और कई अन्य विपक्षी दलों ने पहले भी सरकार से यह आग्रह किया था कि विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार संपन्न होने के बाद महिला आरक्षण के विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। सरकार महिला आरक्षण को वर्ष 2029 से लागू करने और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक संसद के बीते बजट सत्र में लाई थी, हालांकि यह पारित नहीं हो पाया। विपक्ष ने यह कहते हुए इसका पुरजोर विरोध किया कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को थोपा जा रहा है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, अब जब चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है और लोकसभा सीटों के खतरनाक परिसीमन को अंजाम देने की उनकी चाल विपक्षी एकजुटता के कारण बुरी तरह विफल हो गई है, तो प्रधानमंत्री के लिए वह करने का समय आ गया है जो विपक्ष एकजुट होकर मार्च, 2026 के मध्य से लगातार मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बात पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को 2029 से लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या के साथ कैसे लागू किया जा सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा, यह संभव है। यह वांछनीय है। यह जरूरी है। रमेश ने कहा, संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कभी मुद्दा नहीं था। तब एजेंडा केवल प्रधानमंत्री के राजनीतिक संरक्षण के लिए परिसीमन था। अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री अपने व्यक्तिगत राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत की महिलाओं का उपयोग करने के अपने पापों का प्रायश्चित करें और उन्हें न्याय प्रदान करें।
    Click here to Read more
    Prev Article
    कौन हैं 'सिंघम' IPS Ajay Pal Sharma? एनकाउंटर स्पेशलिस्ट जिसकी बंगाल चुनाव में तैनाती ने मचाया बवाल
    Next Article
    गुजरात निकाय चुनाव- 15 नगर निगमों में 10 BJP जीती:बाकी 5 में आगे, अहमदाबाद में पुलिस-भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प; जडेजा की बहन राजकोट से हारी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment