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    Xinjiang Victims Database का बड़ा खुलासा, China के Detention Campaign से 1.4 लाख Uyghur Kids हुए अलग

    9 hours ago

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    'उइघुर टाइम्स' के हवाले से 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस डेटाबेस द्वारा प्रकाशित एक नए विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि 2018 के अंत तक, चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के कारण उइघुर मातृभूमि के दक्षिणी इलाकों के चार प्रान्तों में कम से कम 143,228 बच्चे (जिनमें ज़्यादातर उइघुर थे) अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों से अलग हो गए थे। 27 जुलाई को प्रकाशित यह विश्लेषण काशगर प्रान्त के कोनाशेहर (शुफू) काउंटी के विस्तृत दस्तावेज़ों पर आधारित है। यहाँ शोधकर्ताओं ने हिरासत से जुड़े डेटा के साथ-साथ चीन सरकार के लीक हुए रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पारिवारिक रिश्तों की जानकारी जुटाई। रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन उइघुर परिवारों और बच्चों पर चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के असर का अब तक का सबसे व्यापक अनुमान पेश करता है।इसे भी पढ़ें: China ने नई Sports Development Plan से 2030 तक विश्व-अग्रणी खेल शक्ति बनने का लक्ष्य रखा'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कोनाशेहर काउंटी में ऐसे 21,809 लोगों की पहचान की, जिन्हें 2017 से लंबे समय तक हिरासत में रखा गया था। घर के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और पारिवारिक रिश्तों के डेटा का विश्लेषण करके, उन्होंने ऐसे 3,772 बच्चों की जानकारी दर्ज की जो अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों के हिरासत में लिए जाने के बाद पीछे छूट गए थे। रिपोर्ट में इस संख्या को एक न्यूनतम अनुमान बताया गया है और कहा गया है कि जैसे-जैसे और सरकारी दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे, और मामले सामने आ सकते हैं।विश्लेषण में पाया गया कि प्रभावित परिवारों में अक्सर कई बच्चे थे। जिन परिवारों में माता-पिता को हिरासत में लिया गया था, उनमें औसतन 2.4 बच्चे प्रभावित हुए, जबकि 700 से ज़्यादा परिवारों में तीन या उससे ज़्यादा बच्चे अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। हालांकि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि कई बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में रखा गया या रिश्तेदारों ने उनकी देखभाल की, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा दस्तावेजों से हर प्रभावित बच्चे के भविष्य के बारे में पता नहीं लगाया जा सकता।इसे भी पढ़ें: OpenAI और Anthropic AI आउटपुट का चीनी सेना ने रक्षा प्रणालियों के लिए किया उपयोगइस अध्ययन में माता-पिता को हिरासत में लेने के एक बार-बार दिखने वाले पैटर्न की भी पहचान की गई। नतीजों के अनुसार, दर्ज किए गए ज़्यादातर मामलों में पहले पिताओं को हिरासत में लिया गया, जिन्हें अक्सर 2017 के दौरान लंबी जेल की सज़ा हुई, जबकि माताओं को बाद में 2018 में नज़रबंदी कैंपों में भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन परिवारों में हिरासत की समय-सीमा का साफ़ तौर पर पता लगाया जा सका, उनमें से लगभग 56 प्रतिशत मामलों में यही क्रम देखा गया।
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