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    यूपी के 18 शहरों में दौड़ेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें:लखनऊ और कानपुर को 300-300, वाराणसी को 250 बसें मिलेंगी

    11 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,725 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर किया जाएगा। योजना के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद से लेकर उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के साथ शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना है। लखनऊ और कानपुर को सबसे ज्यादा बसें योजना के तहत लखनऊ और कानपुर में 300-300 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। वाराणसी को 250, गोरखपुर को 150 और आगरा, गाजियाबाद, मेरठ तथा नोएडा (जेवर सहित) को 100-100 बसें मिलेंगी। इसके अलावा मथुरा-वृंदावन और अयोध्या में 50-50 बसें संचालित की जाएंगी। अलीगढ़, फिरोजाबाद, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर और शाहजहांपुर में 25-25 बसें चलाई जाएंगी। प्रयागराज को 50 और झांसी को 25 बसें मिलेंगी। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग शहरों में यात्रियों की जरूरत के अनुसार बसों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। 9 और 12 मीटर लंबाई की होंगी बसें नई बसें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की होंगी। इनकी खरीद के लिए सरकार की ओर से अनुदान दिया जाएगा। 12 मीटर लंबी प्रत्येक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान निर्धारित किया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो बनाने को संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से जरूरत के अनुसार जमीन निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। निजी ऑपरेटर संभालेंगे संचालन और रखरखाव जीसीसी मॉडल के तहत चयनित निजी कंपनियां बसों की खरीद करेंगी। इसके साथ चार्जिंग स्टेशन के लिए जरूरी चार्जर की व्यवस्था, चालक और तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती, बसों का संचालन और रखरखाव भी निजी ऑपरेटरों की जिम्मेदारी होगी। प्रदर्शन के निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं रखरखाव शुल्क दिया जाएगा। वहीं, यात्रियों से लिया जाने वाला किराया सरकार निर्धारित करेगी। इस मॉडल से सरकार को बसों के संचालन और रखरखाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी का लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही समयबद्ध सेवा, परिचालन दक्षता और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार पर जोर रहेगा। अनुबंध की अवधि बसों का व्यावसायिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष होगी। यूपी में बनी बसों की खरीद को प्राथमिकता योजना में उत्तर प्रदेश में निर्मित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। परिवहन विभाग की निर्धारित नीति के तहत एल-1 दर पर प्रदेश में निर्मित बसों की खरीद को वरीयता दी जाएगी। इससे राज्य में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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