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    यूपी का पहला 'स्टेट ऑफ आर्ट' मेंटल हेल्थ सेंटर तैयार:दवाओं से नहीं सुधरने वाले डिप्रेशन का अब मशीनों से होगा इलाज

    1 hour ago

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    मानसिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए कानपुर का जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब प्रदेश का सबसे आधुनिक केंद्र बनने जा रहा है। एलएलआर (हैलट) अस्पताल परिसर में 22 करोड़ रुपए की लागत से बनी मनोरोग विभाग की नई 'स्टेट ऑफ आर्ट' बिल्डिंग पूरी तरह तैयार है। अगले एक महीने के भीतर इस केंद्र में मरीजों की भर्ती और हाईटेक मशीनों से इलाज शुरू हो जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दो साल पहले आवंटित बजट से तैयार यह बिल्डिंग तकनीकी और सुविधाओं के मामले में प्रदेश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां एक ही छत के नीचे मनोरोग की सभी आधुनिक थेरेपी उपलब्ध होंगी। अब दिमाग की नसों को स्टिमुलेट करेंगी मशीनें, दवाओं की निर्भरता होगी कम मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि, यह सेंटर उन गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित होगा, जिन पर दवाइयां काम करना बंद कर देती हैं। सेंटर में RTMS (रिपेटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन) जैसी आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इस पद्धति में बिना किसी चीर-फाड़ के मस्तिष्क के खास हिस्सों को बाहर से ही मैग्नेटिक तरंगों के जरिए उत्तेजित किया जाता है। इससे न केवल मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार आता है, बल्कि दवाओं का असर भी शरीर पर दोबारा शुरू हो जाता है। इसके अलावा यहां TDCS जैसी नई थेरेपी भी उपलब्ध होगी, जो अब तक केवल बड़े निजी संस्थानों या मेट्रो शहरों तक सीमित थी। बिजली के झटकों का डर होगा खत्म, मॉडिफाइड थेरेपी से मिलेगी राहत डॉ. धनंजय पांडे ने बताया कि, लोग मानसिक रोगों के इलाज में 'बिजली के झटकों' (ECT) से डरते थे, लेकिन अब यहाँ मॉडिफाइड ECT और बायोफीडबैक जैसी सुरक्षित सुविधाएं मिलेंगी। इसमें इलेक्ट्रिक करंट्स को मॉडिफाई करके बेहद सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक डिप्रेशन, स्किज़ोफ्रेनिया और साइकोसोमेटिक (मनोदैहिक) बीमारियों के मरीजों के लिए बेहद कारगर है। खास बात यह है कि अब मरीजों को पुरानी ओपीडी के बजाय एक समर्पित बिल्डिंग मिलेगी, जहां डॉक्टरों के चैम्बर्स से लेकर नर्सिंग स्टेशन और आधुनिक लैब एक ही जगह होंगे। प्राइवेट रूम की तर्ज पर बना नशा मुक्ति केंद्र और वाई-फाई कैंपस पुराने बिजली घर के बगल और पीडियाट्रिक विभाग के सामने बनी यह नई बिल्डिंग पूरी तरह से वाई-फाई इनेबल्ड है। यहां 20 बेड का जनरल वार्ड बनाया गया है। साथ ही, नशा मुक्ति के लिए 10 बेड का एक विशेष डी-एडिक्शन वार्ड तैयार किया गया है, जिसे बिल्कुल प्राइवेट रूम्स की तरह सिंगल-सिंगल रूम सेटअप में डिजाइन किया गया है, ताकि मरीजों को बेहतर माहौल मिल सके। डॉ. धनंजय पांडे ने उम्मीद जताई है, कि बिल्डिंग के हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होते ही एक महीने के अंदर इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा, जो पूरे उत्तर प्रदेश में अपने आप में पहला अत्याधुनिक मेंटल हेल्थ अपग्रेडेशन होगा।
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