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    यूपी में महंगी नहीं होगी बिजली?:10% फ्यूल सरचार्ज पर आयोग ने UPPCL से जवाब मांगा, पूछा- किस आधार पर लगाया

    14 hours ago

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    यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। 10% फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) को लेकर यूपी विद्युत नियामक आयोग ने यूपीपीसीएल से 7 दिन में जवाब मांगा है। आयोग ने सोमवार को पूछा कि 10% फ्यूज सरचार्ज की गणना किस आधार पर की गई? 2 साल पुराना बकाया इसमें कैसे जोड़ा गया? दरअसल, यूपीपीसीएल ने जून महीने के लिए 10% फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया था। भीषण गर्मी और बिजली कटौती के बीच फ्यूल सरचार्ज में की गई बड़ी बढ़ोतरी का पूरे प्रदेश में जबरदस्त विरोध हो रहा है। यूपीपीसीएल ने नियमों को ताक पर रखते हुए फ्यूज सरचार्ज में 2 साल पुराना 1400 करोड़ बकाया वसूलने का प्रावधान जोड़ा था। नियमानुसार, 2 महीने पहले बिजली खरीदी की लागत में आने वाले गैप की राशि के आधार पर ही फ्यूल सरचार्ज की गणना हो सकती है। आगे क्या हो सकता है? यूपीपीसीएल अगर 10% फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) में 2 साल पुरानी बकाया राशि जोड़ने का तर्क साबित नहीं कर पाई, तो उपभोक्ताओं को सिर्फ 2% ही FPPCA ही देना पड़ेगा। मतलब 100 रुपए की राशि पर सिर्फ 2 रुपए ही बढ़कर बिल आएगा। उपभोक्ता परिषद ने आयोग में दी थी चुनौती यूपीपीसीएल की इस मनमानी के खिलाफ सोमवार को उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने जनहित एवं लोक महत्व प्रत्यावेदन दाखिल किया था। इस पर आयोग अध्यक्ष से तुरंत संज्ञान लेने की अपील की थी। विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार के मुताबिक, 10 फीसदी ईंधन अधिभार पूरी तरह नियम के विपरीत है। यूपीपीसीएल से 7 दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट दे। वहीं, उपभोक्ता परिषद की ओर से बताया गया कि फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की गणना में मार्च- 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत तो है। लेकिन, 1400 करोड़ रुपए के पुराने बकाए, NTPC के पुराने भुगतान और अन्य देनदारियों को भी इसमें शामिल किया गया है। यह कानून का उल्लंघन है। परिषद का दावा 2% की दर से बनती है एफसीए उपभोक्ता परिषद ने आयोग को बताया कि अगर यूपीपीसीएल ने सही गणना की होती, तो जून- 2026 में उपभोक्ताओं पर करीब 2% की दर से बिजली बिलों में कमी लागू होती। परिषद का दावा है कि आयोग की स्वीकृत बिजली खरीद लागत करीब 4.94 रुपए प्रति यूनिट थी। जबकि, मार्च- 2026 के लिए 5.86 रुपए प्रति यूनिट लागत दर्शाकर उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया गया। 30 मई को UPPCL ने दिया था फ्यूल सरचार्ज लगाने का आदेश UPPCL ने 30 मई (शनिवार) को 10% फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) लगाने का आदेश जारी किया था। इसका सीधा मतलब है कि उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा। अगर किसी का बिजली बिल 100 रुपए आता है, तो उसे 110 रुपए चुकाने होंगे। वहीं, उपभोक्ता परिषद ने इस पर नाराजगी जताई थी। आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। UPPCL ने बताए थे बिजली के दाम बढ़ाने के कारण बिजली विभाग ने बताया था कि बिजली बनाने और इसकी खरीद में आने वाली अतिरिक्त लागत की वजह से फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है। जिससे भरपाई की जा सके। FPPAS (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) का मतलब है कि बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन या बिजली खरीदने की लागत बढ़ जाती है। तब उसकी भरपाई के लिए यह अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं के बिल में जोड़ा जाता है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा था- महंगी बिजली कमर तोड़ देगी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली महंगी करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था- इससे पहले फरवरी- 2026 में सीधे 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की वसूली की जा चुकी है। प्रदेश की जनता भीषण गर्मी, बिजली संकट और बढ़ती महंगाई से परेशान है। ऐसे में बिजली दरें बढ़ाना आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ने वाला साबित होगा। उन्होंने दावा किया था कि विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने टैरिफ आदेश में बिजली खरीद की वास्तविक लागत 4.94 रुपए प्रति यूनिट मंजूर की थी। मार्च- 2026 में पावर कॉरपोरेशन ने करीब 5.86 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाई है। इस तरह उपभोक्ताओं पर करीब 1610 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार डाला गया है। उन्होंने कहा था- मार्च, 2026 में इतनी महंगी बिजली किन परिस्थितियों में खरीदी गई और किन निजी बिजली उत्पादक कंपनियों से बिजली ली गई, इसकी जांच कराई जाए। लगातार निजी बिजली उत्पादकों से अधिक दरों पर बिजली खरीदी जा रही है। मार्च महीने के फ्यूल सरचार्ज में पूर्व अवधि के करीब 1400 करोड़ रुपए के दावों को भी जोड़ दिया गया है। वहीं, UPPCL ने कहा था कि प्रदेश में मूल बिजली दरों (टैरिफ) में पिछले करीब 6 साल से कोई वृद्धि नहीं की गई है। जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत FPPPA बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं, विद्युत नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार लागू होने वाला एक अस्थायी एवं परिवर्तनीय अधिभार है। यह हर महीने वास्तविक विद्युत क्रय लागत के आधार पर घटता-बढ़ता रहता है। ………………………… ये खबर भी पढ़िए… 6 नए न्यूक्लियर प्लांट बिजली की कमी पूरी करेंगे:सबसे ज्यादा पूर्वांचल में बनेंगे; यूपी में अभी सिर्फ 1 न्यूक्लियर प्लांट देश में सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड यूपी में है। इसको पूरा करने के लिए सरकार 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने जा रही है। इनमें नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के हिस्से में 3, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 2 और अडानी ग्रुप 1 पावर प्लांट बना सकते हैं। ये कुल 8400 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट होंगे। पूरी खबर पढ़िए…
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