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    युवाओं में बढ़ रहा कम उम्र में जुए की लत का खतरा, सख्त नियमन और जागरूकता की आवश्यकता: अध्ययन

    21 hours ago

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    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युवाओं में कम उम्र में जुए की लत लगने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकारों को जुए के विज्ञापनों और इससे जुड़े उद्योग पर कड़े नियंत्रण लगाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, परिवारों को भी अपने बच्चों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना होगा। मोनाश यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ चार्ल्स लिविंगस्टोन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में आठ प्रतिशत से अधिक वयस्क जुए के दुष्प्रभावों से प्रभावित हैं, जबकि लगभग एक प्रतिशत वयस्क अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर जुआ खेलते हैं।शोधकर्ताओं का कहना है कि 18 से 34 वर्ष के युवाओं को जुए की लत का सबसे अधिक जोखिम है। इस आयु वर्ग में नियमित रूप से पोकर मशीन जिन्हें पोकी कहा जाता है और ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले लगभग 90 प्रतिशत लोगों को गंभीर आर्थिक नुकसान, आपसी रिश्ते टूटने और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पोकर मशीन और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे जुए के कुछ रूप अन्य माध्यमों की तुलना में अधिक नुकसानदेह हैं और इनसे लत लगने की आशंका बहुत अधिक रहती है।जुए से होने वाला सबसे आम नुकसान आर्थिक होता है, जिसमें व्यक्ति अपनी जीवनभर की बचत या घर तक गंवा सकता है। इसके अलावा, जुआ मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है, जिससे पछतावा, अपराधबोध, शर्म, मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। शोध के अनुसार, यह आदत आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। जुए का नकारात्मक प्रभाव केवल खेलने वाले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और कार्यस्थल पर भी पड़ता है। माता-पिता में जुए की लत का सीधा संबंध पारिवारिक हिंसा, वैवाहिक विवाद और बच्चों की उपेक्षा से पाया गया है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अमेरिकी मनोरोग संघ सहित अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा प्रणालियों ने जुए की लत को एक व्यवहार संबंधी विकार माना है, जिसमें व्यक्ति नुकसान होने के बावजूद अपनी इच्छा पर नियंत्रण नहीं रख पाता। किशोरावस्था में मस्तिष्क के विकास के दौरान जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है, जिससे छोटा पुरस्कार मिलने पर भी डोपामिन का स्राव होता है और लत लगने की संभावना बढ़ जाती है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के कारण अब युवा बिना किसी कैसीनो गए, घर बैठे और परिवार की जानकारी के बिना भी जुआ खेल सकते हैं।अध्ययन में सामने आया है कि जुआ उद्योग आक्रामक विज्ञापनों और डेटा प्रोफाइलिंग के जरिए युवाओं को लक्षित करता है। इस खतरे को रोकने के लिए प्रस्तावित प्रतिबंधों को नाकाफी बताया गया है और विज्ञापनों पर अधिक प्रभावी नियमन की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा जैसी पद्धतियों से इसका उपचार संभव है, लेकिन सामाजिक शर्म के कारण लोग इलाज नहीं कराते। इसके अलावा, पारिवारिक स्तर पर माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे बच्चों के साथ खेलों के केवल मनोरंजन वाले पहलू पर चर्चा करें और जुए को खेल का स्वाभाविक हिस्सा न मानें। इसके अतिरिक्त, रात साढ़े आठ बजे के बाद खेल प्रसारण देखने से बचें क्योंकि इस समय के बाद जुए के विज्ञापन प्रसारित किए जा सकते हैं, और बच्चों के उपकरणों पर जुए की वेबसाइटों को ब्लॉक करने वाले डिजिटल टूल्स का उपयोग करें।
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