Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Yudh Abhyas 2026: Indian Army और US Army का 22वां एडिशन शुरू, जॉइंट ट्रेनिंग जारी

    8 hours ago

    1

    0

    'एक्सरसाइज़ युद्ध अभ्यास 2026' के तहत, भारतीय सेना और अमेरिकी सेना की टुकड़ियाँ अभी कई तरह के प्लेटफॉर्म और ऑपरेशनल हालात में ज़बरदस्त जॉइंट ट्रेनिंग कर रही हैं। भारत-अमेरिका के बीच जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज़ का 22वाँ एडिशन, 'एक्सरसाइज़ युद्ध अभ्यास 2026', 15 सितंबर को शुरू हुआ। अभी चल रही इन एक्सरसाइज़ का मकसद अलग-अलग माहौल में दोनों सेनाओं के बीच कॉम्बैट टैक्टिक्स (लड़ाई के तरीके) को बेहतर बनाना, जॉइंट ऑपरेशनल तैयारी को बढ़ाना और टैक्टिकल प्रक्रियाओं को और बेहतर करना है। हर साल होने वाली इस एक्सरसाइज़ में दोनों देशों के सैनिक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साथ मिलकर ट्रेनिंग करते हैं ताकि टैक्टिक्स, तकनीक और प्रक्रियाओं (TTPs) को बेहतर बनाया जा सके और ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिस का आदान-प्रदान किया जा सके।एक्सरसाइज़ के दायरे के बारे में बताते हुए, भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ पब्लिक इन्फॉर्मेशन (ADG PI) ने एक्स पर कहा एक्सरसाइज़ #YudhAbhyas 2026: #IndianArmy और #USArmy की टुकड़ियाँ कई प्लेटफॉर्म और ऑपरेशनल हालात में साथ मिलकर ट्रेनिंग कर रही हैं, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी बेहतर हो रही है और एक-दूसरे की टैक्टिक्स, तकनीक और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित हो रही है। इसमें आगे कहा गया यह जॉइंट ट्रेनिंग ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान में मदद करती है और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल को मज़बूत करती है, जिससे अलग-अलग ऑपरेशनल माहौल में साथ मिलकर काम करने की उनकी क्षमता बढ़ती है। साथ मिलकर ट्रेनिंग। साथ मिलकर सीखना। साथ मिलकर बेहतर ढंग से काम करना।इसे भी पढ़ें: Indo-Pacific में स्थिरता के लिए साथ आए भारत और Japan, रक्षा तकनीक सहयोग पर दिया जोरइन जॉइंट ड्रिल का मकसद डिफेंस सहयोग को मज़बूत करना, कमांड-एंड-कंट्रोल तालमेल को बेहतर बनाना और यह पक्का करना है कि दोनों सेनाएँ अलग-अलग और मुश्किल इलाकों में आसानी से जॉइंट ऑपरेशन कर सकें।आज इससे पहले, 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' में हिस्सा ले रहे भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने बीकानेर के ऐतिहासिक जूनागढ़ किले और उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ मंदिर का दौरा किया, जिससे उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के दो अलग-अलग पहलुओं को जानने का मौका मिला।जूनागढ़ किले के दौरे से जवानों को राजस्थान के शाही इतिहास, शानदार वास्तुकला और युद्ध-संबंधी परंपराओं की झलक मिली, जबकि हिमालय में स्थित बद्रीनाथ मंदिर के दौरे से उन्हें भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और सदियों पुरानी विरासत के बारे में जानकारी मिली।इसे भी पढ़ें: 7 दिन में खोल देंगे होर्मुज, लेकिन...ईरान ने अमेरिका के सामने रख दी कौन सी शर्त! क्या ट्रंप होंगे राजी?ट्रेनिंग के दायरे से बाहर सांस्कृतिक गतिविधियों ने भारतीय और अमेरिकी जवानों के बीच भाईचारे, आपसी समझ और सम्मान को बढ़ाया, जिससे दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते रिश्तों को एक नया आयाम मिला।सोमवार को, दोनों सेनाओं के जवानों ने उत्तराखंड के औली में 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' के तहत जंगल वॉरफेयर, इनडोर फायरिंग और रॉक-फेस रैपलिंग की जॉइंट ट्रेनिंग की, जिससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और एक-दूसरे के काम करने के तरीकों की समझ और मज़बूत हुई।
    Click here to Read more
    Prev Article
    न्यूयॉर्क में ईरान के राष्ट्रपति को ट्रंप गिरफ्तार कर लेंगे? खेल चौंका देगा!
    Next Article
    Indo-Pacific में स्थिरता के लिए साथ आए भारत और Japan, रक्षा तकनीक सहयोग पर दिया जोर

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment