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    119 साल पुराने पातालेश्वर मंदिर में करेंगे जलाभिषेक:महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन, पुलिस-प्रशासन अलर्ट; मस्से और चर्म रोग ठीक होने की मान्यता

    1 hour ago

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    महाशिवरात्रि के अवसर पर जनपद संभल का पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने छह प्रमुख मंदिरों का दौरा कर सीसीटीवी कैमरों और आने-जाने के रास्तों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। संभल के बहजोई कोतवाली क्षेत्र के सादातबाड़ी गांव में स्थित प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर लगभग 119 साल पुराना है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और चमत्कारी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। सावन के महीने में यहां मेले जैसा माहौल रहता है और आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु पवित्र शिवलिंग का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। प्रत्येक सोमवार को भी सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, चर्म रोग ठीक होने के दावे किए जाते हैं। गुन्नौर की रहने वाली मुस्लिम महिला मुन्नी ने बताया कि उनकी बेटी दीप्ति के मस्से खत्म हुए हैं। वह बाबा का प्रसाद चढ़ाने के लिए अपनी बेटियों मुस्कान और सायमा के साथ यहां आई हैं। देखें, 4 तस्वीरें… मंदिर के महंत मोहर गिरि के अनुसार, उन्नीसवीं शताब्दी में भगवान शिव पातालेश्वर बाबा इस स्थान पर प्रकट हुए थे। वर्तमान मंदिर स्थल पर पहले ढाक, बेरी, खजूर और पतेल का घना जंगल था। ग्रामीणों ने घास काटते समय पहली बार शिवलिंग रूपी पातालेश्वर महादेव को देखा था। एक ग्रामीण ने अपनी खुरपी की धार तेज करने के लिए उस पत्थर पर रगड़ी, तभी उसे एक चुंबकीय शक्ति का अनुभव हुआ और शरीर में कंपन पैदा हो गया। इस घटना को ग्रामीण ने गांव में बताया, जिसके बाद गांव के बुजुर्गों ने भी इस चमत्कार को देखा। उन्होंने इसे भगवान पातालेश्वर का प्रकट होना मानकर आसपास साफ-सफाई कर एक चबूतरा बना दिया। 7 सितंबर 1902 को बहजोई के जमींदार साहू भिखारीदास ने इस मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया था। श्रावण मास में हर साल पूरे महीने यहां मेले जैसा माहौल रहता है। संभल जिले के अलावा बुलंदशहर, बदायूं, मुरादाबाद और अलीगढ़ जैसे जिलों से भी श्रद्धालु मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं।
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