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    16 फर्जी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ की टैक्स चोरी:महिला समेत 4 गिरफ्तार, लखनऊ में कारोबारियों को जीएसटी ITC बेचते थे

    7 hours ago

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    लखनऊ में फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ रुपए की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर सेल, सर्विलांस और इटौंजा पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सरगना फरार है। 16 बोगस फर्मों के जरिए कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेची जाती थी। लखनऊ इनकम टैक्स विभाग की शिकायत पर जीएसटी फ्रॉड सामने आया है। सहायक आयुक्त राज्य कर अभिमन्यु पाठक की तहरीर पर फर्जी फर्म स्वराज ट्रेडर्स के जरिए बोगस आईटीसी बेचकर टैक्स चोरी करने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद टैक्स चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया- जांच में सामने आया कि 8 अप्रैल 2024 को GSTIN लेकर एल्युमिनियम वेस्ट, फेरस वेस्ट, स्क्रैप, ट्यूब पाइप, आयरन व स्टील की बिक्री दिखाने वाली स्वराज ट्रेडर्स नाम की फर्म असल में थी ही नहीं। फर्म का फर्जी किरायानामा लगाकर रजिस्ट्रेशन कराया गया था। अब पढ़िए कैसे हुआ खुलासा… जांच में सामने आया कि स्वराज ट्रेडर्स जैसी 15 से अधिक फर्जी फर्में बनाकर एक गैंग काम कर रहा था। गैंग में साकेतनगर जूही कालोनी की रहने वाली तबस्सुम उर्फ गुलचमन उर्फ जान्हवी सिंह पत्नी नरेन्द्र सिंह, कल्याणपुर कानपुर के रहने वाले प्रशांत बेन्जवाल (30), इंदिरा नगर सेक्टर- 11 के रहने वाले सुमित सौरभ (35) पुत्र जितेन्द्र कुमार और नौबस्ता कानपुर नगर निवासी दौलत राम पुत्र बदलूराम शामिल थे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 52 लाख 266 रुपए का टैक्स आईटीसी के जरिए अन्य फर्मों को बेचा गया। 19 लाख की अतिरिक्त कर चोरी लालच देकर लोगों के आधार, पैन, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और पते लिए जाते थे। गैंग का लीडर अम्मार अंसारी फर्जी किरायानामा तैयार कर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराता था। फर्म के नाम पर फर्जी GST-R1 भरकर ITC जनरेट की जाती थी। प्रशांत 1% कमीशन लेकर फर्जी इनवॉइस बनाता और ITC बेचता था। जांच में SS Galaxy और SS Enterprises नाम की फर्मों का भी खुलासा हुआ। इनके मालिक सुमित सौरभ को गिरफ्तार किया गया है। इन फर्मों के जरिए 19 लाख 1 हजार 242 रुपए की जीएसटी चोरी की गई। भुगतान के तौर पर दो साइन किए हुए चेक, एक लाख नकद और एक लाख स्वराज ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर किए गए। उस खाते का डेबिट कार्ड प्रशांत और तबस्सुम के पास से बरामद हुआ। अब पढ़िए कौन क्या करता था… पुलिस ने बताया- दौलत राम कानपुर में मजदूर है। 20 हजार रुपए के लालच में दस्तावेज उपलब्ध कराए। तबस्सुम पहले टिफिन सर्विस चलाती थीं। ज्यादा कमाई के लालच में फर्जी फर्म रजिस्ट्रेशन के खेल में शामिल हुई। गैंग में शामिल प्रशांत बेन्जवाल पहले विशाल मेगा मार्ट में कैशियर था। बाद में नौकरी छोड़ गिरोह में शामिल हुआ। फर्जी इनवॉइस और ITC जनरेट करना इसका काम था। विशाल मेगा मार्ट में ही तबस्सुम और प्रशांत की मुलाकात हुई। सुमित सौरभ वास्तविक फर्म का मालिक है, टैक्स चोरी के लिए बोगस ITC खरीदता था। सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी गैंग का सरगना है। फर्जी किरायानामा और GST रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया संभालता था। पहले भी जीएसटी फ्रॉड में जेल जा चुका है। जो अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश की जा रही है। ज्यादा रुपयों की लालच में बनाया गैंग पूछताछ में तबस्सुम ने बताया- उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी। जिसने उसे बेच दिया था। इसके बाद उसने कानपुर में नरेंद्र से शादी की लेकिन 2017 में उसके पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिलने पर उसे छोड़ दिया। साल 2020 में कानपुर स्थित वी मार्ट में कैशियर प्रशांत से उसकी पहचान हुई। प्रशांत का वेतन मात्र 10 हजार रुपए था। दोनों साथ रहने लगे और टिफिन सर्विस शुरू की लेकिन कम आमदनी के चलते कम समय में अधिक पैसा कमाने की योजना बनाई। इस दौरान दोनों ने अम्मार अंसारी से संपर्क किया और फर्जी जीएसटी के जरिए आईटीसी बेचने की प्लानिंग की। प्रति फर्म एक लाख रुपए लेते थे आरोपी डीसीपी ने बताया- तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते उपलब्ध करा दें। ये दस्तावेज अम्मार को सौंप दिए जाते थे। जिसके जरिए फर्जी जीएसटी रजिस्टर कराया जाता था। प्रत्येक फर्म के एवज में तबस्सुम और प्रशांत को एक लाख रुपए मिलते थे। इन फर्मों में से एक का मालिक दौलतराम को बनाया गया था।
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