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    1600 ड्रोन से रूस के तेल पर बहुत बड़ा हमला, अब दुश्मनी भूल हाथ मिलाएंगे भारत-चीन!

    4 hours ago

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    यूक्रेन ने 20 सितंबर को यहां कई ड्रोन हमले किए हैं। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन की तरफ से आने वाले 1600 ड्रोंस को उसने इंटरसेप्ट किया है । इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। कई इमारतों को इसमें नुकसान भी पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग चल रही थी। वोटिंग का अंतिम दिन था। लोअर हाउस जो संसद है रूस का उसके लोअर हाउस के लिए यह वोटिंग थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलदोमीर जेलस्की ने खुद हमले की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, हमने रूस की ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। यह वही अरबों डॉलर का तंत्र है जहां रूस अपने डिफेंस का सामान तैयार करता है। जेलेंस्की ने यह भी बताया हमले में यूक्रेन ने क्या-क्या इस्तेमाल किया है। एफपी1 आर एमआईसीए 2000 पालतसिया वेंडेटा ल्यूती, बार्स, फ्लेमिंगो, सिचन और पेिकन यह तमाम हथियार हैं जिसका इस्तेमाल यूक्रेन ने किया है। यह सभी कामिकाजे ड्रोंस हैं। कुछ ड्रोन का मिसाइल हैं। लंबी दूरी वाले ड्रोंस हैं ये। जेलस्की ने बताया कि यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस एसबीयू ने अनमैंड सिस्टम फोर्सेस डिफेंस इंटेलिजेंस और फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया है। मॉस्को के मेयर सरगेई सोवियान ने बताया कि रूसी एयर डिफेंस ने अब तक 1600 से ज्यादा ड्रोंस को इंटरसेप्ट किया, मार गिराया। जिनमें से 450 ड्रोनस सीधे राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे यूक्रेन की तरफ से। सोबियान ने टेलीग्राम पर बताया यह हमला साफ तौर पर इलेक्शंस में बाधा डालने के इरादे से प्लान किया गया था। लेकिन दुश्मन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका। सोबियान के मुताबिक कई ड्रोंस मॉस्को की तेल रिफाइनरी के अंदर पहुंच गए जिसे पहले भी हमलों में निशाना बनाए जाने की कोशिश की जा चुकी है। इस ऑयल रिफाइनरी को पहले भी यूक्रेन टारगेट कर चुका है।इसे भी पढ़ें: Russia से तेल खरीद पर US Tariff के बीच बोले Kirti Vardhan Singh, जनता का हित सर्वोच्च प्राथमिकताअमेरिका ने जो किया है उसे देखकर भारत, रूस और चीन को जल्द ही बहुत बड़ा फैसला लेना होगा क्योंकि निशाने पर भारत, रूस और चीन ही हैं। इस मुश्किल घड़ी में अगर चीन ने भारत का साथ नहीं दिया तो चीन का मरना तो तय है ही, लेकिन नुकसान भारत को भी उठाना पड़ सकता है। दरअसल एक बहुत बड़ा तूफान आने वाला है क्योंकि अमेरिका ने भारत और चीन को बर्बाद करने के लिए सऊदी अरब और रूस पर हमले करवा दिए हैं। सबसे पहले अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों से संपर्क किया। इसके तुरंत बाद सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल रिफाइनरीज पर हमले शुरू हो गए। स्टेट ऑफ हार्मोस पहले से ही बंद थी। लेकिन अब लाल सागर के पास बाबल मंदेव स्ट्रेट पर भी खतरा मंडराने लगा है। यही वो दो स्ट्रेट्स हैं जिनके जरिए भारत और चीन को सबसे ज्यादा कच्चा तेल मिलता है। इसके अलावा यही वो दो स्टेट्स हैं जहां से सऊदी अरब और रूस सबसे ज्यादा कच्चा तेल बेचते हैं। मगर अमेरिका ने दोनों पर ग्रहण लगा दिया है। इसी बीच रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर यूक्रेन ने बहुत बड़ा हमला किया है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद मॉस्को की तेल रिफाइनरी में आग लग गई। यह आग क्रेमलिन में पुतिन के दफ्तर से सिर्फ 15 कि.मी. दूर लगी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की बड़े मजे लेकर यह वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। हैरानी की बात देखिए कि रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर हमले के बाद अमेरिका ने यूक्रेन को तुरंत 2.68 अरब डॉलर के एयर डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पैकेज में S300 क्लोन मिसाइलें, GM67 मिसाइलें और काउंटर ड्रोन रडार सिस्टम्स शामिल हैं। यहां पर अमेरिका की मक्कारी देखिए। अमेरिका हमेशा से यह बोलता आया है कि भारत और चीन रूस से तेल खरीद रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Ukraine के कब्जाए इलाकों में Russia ने कराया State Duma चुनाव, कीव ने बताया अवैधइसीलिए यूक्रेन जंग रुक नहीं रही। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका यूक्रेन को लगातार हथियार दे रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब और यूक्रेन के तेल को निशाना बनाकर अमेरिका ग्लोबल ऑयल सप्लाई को बाधित कर रहा है। दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल की सप्लाई अब कम हो रही है। आने वाले दिनों में दाम बढ़ने तय हैं। आपको बता दें कि भारत और चीन को अगर सऊदी अरब और रूस दोनों से पूरी तरह कच्चा तेल मिलना बंद हो गया तो दोनों की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा झटका लगेगा। लेकिन भारत को जो नुकसान होगा उसकी कीमत दुनिया को चुकानी पड़ेगी क्योंकि भारत के पास ही ऐसी ऑयल रिफाइनरीज हैं जो रूस के कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं और उसे पेट्रोल और डीजल बनाकर दुनिया भर में सप्लाई करती हैं। इस मुश्किल घड़ी में रूस, चीन और भारत को मिलकर धमाका करना होगा।
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