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    25 बस्तियों के 50 हजार लोग बाढ़ में फंसे:कानपुर में घरों में घुसा गंदा पानी, स्कूल-काम बंद; सैकड़ों परिवार पलायन को मजबूर

    5 hours ago

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    'जिन गलियों में कुछ दिन पहले तक बच्चों की स्कूल जाते थे,महिलाएं बाजार निकलती थीं और बुजुर्ग टहलने निकलते थे। आज उन्हीं रास्तों पर सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है।' ये कहते हुए कानपुर के मकड़ीखेड़ा में रहने वाली प्रियंका वर्मा की आंखों में आंसू आ गए। पास में ही उनके बच्चे भी खड़े थे। यहां के करीब 25 मोहल्लों और बस्तियों के 50 हजार लोग पिछले एक हफ्ते से जलभराव की मार झेल रहे हैं। कहीं घरों के अंदर पानी भर गया है तो कहीं लोग छतों और दूसरी मंजिल पर रहने को मजबूर हैं। सैकड़ों परिवार घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं, जबकि कई इलाकों में बच्चे स्कूल और लोग काम पर नहीं जा पा रहे हैं। नाले चोक हैं, जलकुंभी और गंदगी से पानी की निकासी बंद है और बोरिंग तक डूब गई हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने मकड़ीखेड़ा और आसपास के इलाकों में पहुंचकर जाना कि जलभराव के बीच लोग कैसे जिंदगी गुजार रहे हैं और उनकी सबसे बड़ी परेशानी क्या है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. 5 तस्वीरें देखिए… 25 बस्तियों के 50 हजार लोग जलभराव से परेशान मकड़ीखेड़ा, गुप्ता कॉलोनी, सुख्खूपुरवा, इंदिरा नगर, धुन्नूपुरवा, पहलवान पुरवा, अग्निहोत्री नगर और ख्योरा समेत करीब 25 बस्तियों के 50 हजार लोग जलभराव से परेशान हैं। घरों से बाहर निकलने के लिए लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं। लोगों का कहना है कि किसी के बीमार पड़ने या आपात स्थिति में उसे अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है। उनका आरोप है कि हर साल बारिश में इन इलाकों में जलभराव होता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। इस बार 10 साल का रिकॉर्ड टूटा श्रीराम कृपा एस्टेट सोसाइटी निवासी विशाल मिश्रा ने बताया कि पिछले 10 साल में इस बार सबसे ज्यादा जलभराव हुआ है। इलाके के लोग परेशान हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि मैनावती रोड पर पाइपलाइन का काम करीब सात साल से चल रहा है, लेकिन अभी तक घरों तक पानी की सुविधा नहीं पहुंची है। नाले में जलकुंभी और गंदगी जमा है। उनका कहना है कि दो महीने पहले ही नालों की सफाई करा दी जाती तो आज हजारों लोगों को इस परेशानी से नहीं जूझना पड़ता। नाला चोक होने से मकड़ीखेड़ा में पहुंच रहा पानी राजेश कुमार ने बताया कि इस बार नाले ने विकराल रूप ले लिया है। पहले इतना पानी कभी नहीं आता था। उन्होंने कहा कि मंधना नाला महाराणा प्रताप क्षेत्र के पास से होकर गंगापुर की तरफ से आता है। मटका चौराहा और पारस हॉस्पिटल के पास नाला चोक है। यहां से पानी एनआरआई सिटी की ओर पहुंच रहा है। लोधर गांव के पास भी नाला चोक है। इसी वजह से लोधर गांव होते हुए डीपीएस स्कूल, कल्याणपुर-बिठूर रोड की तरफ से आने वाला पानी मकड़ीखेड़ा में भर रहा है। नालों में गंदगी, सिल्ट और जलकुंभी होने से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इससे आसपास की बस्तियां जलमग्न हो गई हैं। जागेश्वर मंदिर तक हजारों घरों में पानी पहुंच गया है। घर के अंदर पानी, फर्नीचर खराब एनआरआई सिटी के पास ख्योरा में रहने वाली खुशी ने बताया कि हर साल बारिश में उनके घर में पानी भरता है, लेकिन इस बार हालात बेहद खराब हैं। घर के अंदर पानी भरने से फर्नीचर खराब हो गया है। किचन में भी पानी भरा होने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि गंदे सीवर के पानी के कारण बीमारी फैलने का डर बना हुआ है। अगर जल्द पानी नहीं निकला तो परिवार को घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ेगा। बोरिंग डूबीं, पीने के पानी का संकट इश्वरीगंज में रहने वाले अशोक कुमार कुशवाहा ने बताया कि नाले का पानी कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। नाले के किनारे मकान होने के कारण पानी घरों तक पहुंच गया है। पानी भरने से इलाके की कई बोरिंग डूब गई हैं, जिससे पीने के पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने बताया कि कई लोग मकान छोड़कर जा चुके हैं। जिनके मकान दो मंजिला हैं, वह परिवार सहित दूसरी मंजिल पर रहने को मजबूर हैं। कई गाड़ियां भी पानी में डूब गई हैं। बच्चों की पढ़ाई और लोगों की नौकरी प्रभावित भवानी गैस गोदाम के पास रहने वाली प्रियंका ने बताया कि हर साल बारिश में यहां जलभराव होता है। इतना पानी भर जाता है कि बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और पति को ड्यूटी जाने में परेशानी होती है। जलभराव के कारण रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेने में भी दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि बिजली कटौती भी लगातार जारी है। गंदा पानी घर के अंदर पहुंच गया है और सीवर टैंक भी भर गया है। पीने के पानी का रंग भी पीला आ रहा है। अधिकारी फोटो खिंचाकर लौट रहे, मगरमच्छ और सांप का खतरा अभिषेक कुमार ने बताया कि मकड़ीखेड़ा के नाले का टेंडर पास हो चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। नाले का पानी चारों तरफ की आबादी में फैल गया है। गलियों में कमर तक पानी भरा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। यहां मगरमच्छ, सांप जैसे जीव लगातार निकल रहे हैं। रात के समय घर से निकलने में सबसे ज्यादा डर लगता है। पानी के अंदर गड्‌ढे दिखाई नहीं देते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि घरों में गंदा पानी आ रहा है, इसके बावजूद लोगों को न तो पानी मिल रहा है और न ही राशन की सुविधा। उनका कहना है कि अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और वापस चले जाते हैं। अभिषेक ने कहा कि चुनाव के समय नेता घर-घर वोट मांगने के लिए मोहल्लों में पहुंचते हैं, लेकिन आज जब हजारों परिवार जलभराव में फंसे हैं तो मदद के लिए कोई नजर नहीं आ रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार समस्या की जानकारी अधिकारियों को देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया। बाइक एक किमी दूर खड़ी कर रहे मैनावती-ख्योरा कछार निवासी दीपक तिवारी ने बताया कि सड़क पर नाले का पानी आने से घरों में भी पानी भर गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बाइक करीब एक किलोमीटर दूर मैनावती रोड पर खड़ी करनी पड़ रही है। घर का जरूरी सामान लेने के लिए भी लोगों को इसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दो साल में 3 किमी नाले का निर्माण शुरू नहीं हो सका मकड़ीखेड़ा नाला करीब तीन किलोमीटर लंबा है। यह बिठूर रोड स्थित डीपीएस स्कूल के पास से शुरू होकर मैनावती मार्ग स्थित एनआरआई सिटी तक जाता है। बजट जारी होने के बाद भी दो साल में नाले का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। नाला कई जगह से क्षतिग्रस्त है और जगह-जगह चोक पड़ा हुआ है। समय पर सफाई और मरम्मत न होने के कारण गंदा पानी इलाकों में भर गया है। नाले की नियमित सफाई और मरम्मत नहीं होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी की समस्या और गंभीर हो जाती है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय तीन दिन में दो बार और विधायक नीलिमा कटियार ने एक बार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है। इस दौरान नगर आयुक्त को जनता की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। हालांकि यहां जलभराव से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
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