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    35 को फांसी की सजा सुनाने वाले जज का ट्रांसफर:मुजफ्फरनगर फैमिली कोर्ट भेजे गए; कहा था- कायर कहलाने से बेहतर है मर जाऊं

    5 hours ago

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    मुजफ्फरनगर में 5 महीने में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाकर सुर्खियों में आए जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश (ADJ) बनाया गया है। उनकी जगह अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया। रवि कुमार दिवाकर ने अपनी 17 साल की सेवा में कुल 35 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर में उन्होंने 6 अप्रैल से 7 सितंबर के बीच 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड दिया है। अगस्त में जिला जज ने उनकी कोर्ट से करीब 100 मुकदमों को वापस लेकर दूसरी अदालतों में ट्रांसफर कर दिया था। 7 सितंबर को शाहपुर की शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए उन्होंने फैसले में अपना दर्द बयां किया था। उन्होंने कहा था- "मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन डरपोक जज कहलवाना नहीं। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, तब तक सेवा में रहूंगा, वरना इस्तीफा दे दूंगा।" न्याय विभाग में फेरबदल किया गया 29 नवंबर 2025 को संभाला था कार्यभार न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली में तैनात रहे। पिछले साल 29 नवंबर को बरेली से स्थानांतरित होकर आए थे। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रहते हुए उन्होंने मुजफ्फरनगर और शामली जिले के चर्चित मामलों की सुनवाई की। जज दिवाकर की अदालत से 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने हत्या की 97 केस वापस ले लिए थे। इसके बाद जिला जज रिटायर हो गए। कई बार टिप्पणियों को लेकर सुर्खियों में रहें जज रवि कुमार दिवाकर अपने फैसलों और न्यायिक टिप्पणियों के कारण कई बार सुर्खियों में रहे हैं। उनके कुछ फैसलों और टिप्पणियों को लेकर विवाद भी हुए हैंः- ------------------------ ये खबर भी पढ़ेंः- यूपी में जज ने लिखा-मरना पसंद, डरपोक कहलाना नहीं:अब तक 36 को फांसी की सजा दी; जिला जज ने उनकी कोर्ट से 100 केस हटाए थे ‘मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं। तब तक सर्विस करूंगा, वरना इस्तीफा दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं, तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।’ यह टिप्पणी मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में लिखी। पूरी खबर पढ़िए
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