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    600 रुपये मानदेय पर सवाल, आशा कार्यकर्ताओं का दर्द:मैनपुरी में मजदूर संघ का हुंकार, “समान काम समान वेतन” की गूंज

    3 hours ago

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    मैनपुरी में भारतीय मजदूर संघ ने अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। संघ के जिला अध्यक्ष अरुण चौहान के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने तथा उनका मानदेय बढ़ाने की प्रमुख मांगें उठाई गईं। ज्ञापन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मियों की समस्याओं के समाधान और असंगठित मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई। इसके अतिरिक्त, 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों की बहाली, सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और पुराने पेंशनर्स को पेंशन दिलाने की मांग भी शामिल थी। ऑटो व ई-रिक्शा यूनियन के लिए पार्किंग की समुचित व्यवस्था करने का मुद्दा भी उठाया गया। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के जिला संयोजक डॉ. ललित पांडे ने बताया कि 'समान काम के बदले समान वेतन' और नियमितीकरण उनकी मुख्य मांगें हैं। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख कर्मचारी एनएचएम के तहत कार्यरत हैं, जिनमें से मैनपुरी में 670 कर्मचारी शामिल हैं। डॉ. पांडे के अनुसार, कम वेतन और अस्थिर सेवा शर्तों के कारण इन कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पोर्टल व्यवस्था लागू होने के बाद से वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। इस बार भी उन्हें दो से तीन महीने की देरी से भुगतान हुआ। उनका कहना है कि कम वेतन का एक बड़ा हिस्सा इलाज और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर खर्च हो जाता है, ऐसे में स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा उनके लिए अत्यंत आवश्यक है। अरुण चौहान ने आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्हें एक केस पर मात्र 600 रुपये का मानदेय मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें से 200 से 300 रुपये तक कथित रूप से अधिकारियों को देने पड़ते हैं, जिसे उन्होंने 'शोषण' करार दिया। चौहान ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी स्थायी हैं, उनसे अधिक ड्यूटी संविदा कर्मी करते हैं, फिर भी उन्हें कम वेतन मिलता है।
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