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    ​आज पानी बचाएंगे तो कल सुरक्षित होगा:CSJMU में नेशनल समिट; विशेषज्ञों बोले- हर बूंद कीमती, री-यूज ही एकमात्र विकल्प

    3 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में जल संकट से निपटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए एक विशेष पहल शुरू की गई है। विश्वविद्यालय के आत्मोदय हॉबी काउंसिल के गार्डनिंग क्लब की ओर से आयोजित 'नेशनल अवेयरनेस एंड इनोवेशन समिट' में विशेषज्ञों और छात्रों ने भविष्य के लिए पानी बचाने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान कैंपस में 'सीएसजेएमयू वॉटर रिक्लेमेशन प्लान' को लागू करने की रूपरेखा भी तैयार की गई। लेक्चर हॉल एल-1 में आयोजित इस समिट का मुख्य एजेंडा पानी की हर बूंद का सदुपयोग करना रहा। शोध प्रस्तुतियों के दौरान यह बात सामने आई कि घरों और संस्थानों में आरओ (RO) सिस्टम और एसी (AC) से निकलने वाला वेस्ट पानी काफी मात्रा में बर्बाद होता है। इसे तकनीक के जरिए फिल्टर करके गार्डनिंग या अन्य कामों में उपयोग किया जा सकता है। छात्रों ने स्मार्ट इरिगेशन सिस्टम और ग्रे वॉटर फिल्ट्रेशन के मॉडल प्रदर्शित कर यह बताया कि कैसे कम पानी में बेहतर सिंचाई संभव है। छात्रों ने दिखाए नवाचार के मॉडल समिट में पहुंचे विशेषज्ञों ने कहा कि जल संरक्षण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा तैयार किए गए इनोवेटिव मॉडल्स आकर्षण का केंद्र रहे। इसमें बताया गया कि छोटे-छोटे तकनीकी बदलावों के जरिए कैसे बड़े स्तर पर जल संचयन किया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि इन मॉडल्स को केवल लैब तक सीमित न रखकर पूरे कैंपस में लागू किया जाए ताकि पानी की खपत को कम किया जा सके। वॉटर रिक्लेमेशन प्लान की शुरुआत इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'सीएसजेएमयू वॉटर रिक्लेमेशन प्लान' रहा। इसके तहत कैंपस के भीतर ही पानी के पुनर्चक्रण (रीसायकल) की व्यवस्था विकसित की जाएगी। समिट में बर्तन बैंक के नितेश सचान और फ्लोटा के सीईओ भुवन भाटिया सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थान इस तरह के मॉडल अपनाएंगे, तो नई पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागेगा। कार्यक्रम का सफल संचालन हॉबी क्लब की संयोजक डॉ. ममता तिवारी और उप-संयोजक अभिषेक मिश्रा ने किया। इस दौरान क्लब के महासचिव दिव्यांश मिश्र और गार्डनिंग क्लब से दिव्यांश पटेल समेत बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पानी के पुनः उपयोग और संरक्षण का संकल्प लिया।
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