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    आज रावण चुनाव लड़ता तो जनता को सुख-समृद्धि देता:आगरा की लीला में पवन 12 साल से किरदार निभा रहे, पढ़िए क्यों बने दशानन

    1 day ago

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    आज के दौर में अगर रावण होता और चुनाव लड़ता तो वह जनता को अच्छी सुविधाएं देने का वादा करता। उसका सोने का महल था, इसलिए वह जनता के घरों में भी सोना बरसाने की बात करता। रामायण में उसने सीता का हरण किया था। लेकिन वर्तमान में वह नेताओं के झूठे वादों और भ्रष्टाचार का हरण करता। जनता झूठे वादों से परेशान है।' यह कहना है कि आगरा की रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले मथुरा के रहने वाले पवन चतुर्वेदी का। उन्होंने कहा कि रावण का किरदार निभाना मेरे लिए अलौकिक अनुभव है। मैंने रावण का किरदार इसलिए चुना, ताकि मैं अनुभव कर सकूं कि राम के हाथों मृत्यु पाने के समय रावण को कैसी अनुभूति हुई होगी। पवन पिछले 28 साल से रामलीला से जुड़े हैं। करीब 12 साल से रावण का किरदार निभा रहे हैं। इससे पहले वह भगवान राम की भूमिका निभाते थे। पढ़िए खास बातचीत… सवाल: अयोध्या में राम मंदिर बन गया है। क्या आप रामलला के दर्शन करने गए थे? जवाब: हां, मैंने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से इतना भव्य मंदिर तैयार हुआ है। वहां दर्शन करने के बाद ऐसा महसूस हुआ। जैसे साक्षात ठाकुरजी श्रीराम के दर्शन कर रहा हूं और रामलला स्वयं वहां विराजमान हैं। वह अनुभव मेरे लिए बेहद खास था। सवाल: रामलीला में सीता हरण करते समय आपके मन में क्या चलता है? जवाब: जब मैं सीता हरण का दृश्य करता हूं, तब रावण के चरित्र की भावनाओं को महसूस करने की कोशिश करता हूं। उस समय रावण ने कहा था कि अगर ये मां जगदंबा हैं, तो मैं इन्हें आधार बनाकर अपने कुल सहित विष्णुधाम के लिए प्रस्थान करूंगा। सीता मां जगदंबा थीं। रावण ने भगवान श्रीराम के हाथों मृत्यु पाकर अपने कुल सहित उनका सान्निध्य प्राप्त किया। सवाल: अगर आज के समय में रावण चुनाव लड़े तो कैसे वादे करेगा? जवाब: रावण तो तीनों लोक और 14 भुवनों का राजा था। उसके सामने कौन प्रतिद्वंद्वी होता। लेकिन अगर मैं असल जिंदगी में चुनाव लड़ूं, तो भ्रष्टाचार और नेताओं के झूठे वादों की परंपरा खत्म करना चाहूंगा। चुनाव के समय नेता जनता से बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पूरा नहीं करते। रावण ऐसा नहीं करेगा। वह जनता को अच्छी सुविधाएं देता। सवाल: आपने भगवान राम की भूमिका छोड़कर रावण का किरदार क्यों चुना? जवाब: मैं वर्ष 2014 तक भगवान राम का किरदार निभाता रहा। इसके बाद रावण की भूमिका निभाने लगा। राम का किरदार निभाने के बाद रावण की भूमिका चुनने की एक वजह यह भी थी कि मैं जानना चाहता था कि रावण को भगवान श्रीराम के हाथों मृत्यु पाने के समय कैसी अनुभूति हुई होगी। रावण का किरदार अपने आप में अलौकिक है। सवाल: आज के समय में आपको किसी का हरण करना पड़े तो किसका करेंगे? जवाब: आज के समय में मैं नेताओं के झूठे वादों का हरण करूंगा। जनता भ्रष्टाचार और बेईमानी से परेशान है। चुनाव के समय नेता वादे करते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पूरा नहीं करते। मैं ऐसी राजनीति और झूठे वादों को खत्म करना चाहूंगा, ताकि जनता को राहत मिल सके। सवाल: आप किसकी पूजा करते हैं? जवाब: मैं असल जिंदगी में ब्राह्मण हूं और भगवान श्रीराम की पूजा करता हूं। रावण का किरदार निभाना मेरी भूमिका है, लेकिन भगवान श्रीराम के प्रति मेरी श्रद्धा बनी हुई है। सवाल: विभीषण को घर का भेदी कहा जाता है। आप उन्हें हीरो मानते हैं या विलेन? जवाब: विभीषण को देखने के दो नजरिए हैं। धर्म की दृष्टि से देखें तो वह हीरो थे, क्योंकि उन्होंने अपने भाई रावण की राक्षसी प्रवृत्ति का साथ नहीं दिया। समाज की दृष्टि से देखें तो उन्होंने अपने ही कुल की बातें बताकर उसके विनाश का रास्ता खोला। लेकिन मैं असल जिंदगी में विभीषण को हीरो मानता हूं, क्योंकि उन्होंने अपने भाई को भगवान श्रीराम के हाथों मुक्ति पाने का रास्ता दिखाया। सवाल: रावण का किरदार निभाने के लिए क्या खास तैयारी करते हैं? जवाब: मैं पिछले 28 साल से रामलीला से जुड़ा हूं। इतने वर्षों में अलग-अलग किरदार निभाने का अनुभव मिला है। करीब 12 साल से रावण की भूमिका निभा रहा हूं। लंबे समय तक इस किरदार को निभाने से इसके संवाद, भाव और व्यक्तित्व को समझने में मदद मिली है। रावण का किरदार निभाते-निभाते इसका असर मेरी असल जिंदगी पर भी पड़ा है। सवाल: क्या रावण का किरदार निभाने की वजह से लोगों का व्यवहार आपके प्रति बदल जाता है? जवाब: हां, इसका असर असल जिंदगी में भी दिखाई देता है। मेरे दोस्त और दूसरे लोग कई बार मुझे रावण कहकर बुलाते हैं। वे कहते हैं कि तुम तो रावण हो और तुम्हारी बातें भी वैसी ही हैं। किरदार के कारण लोगों के मन में मेरी एक अलग छवि बन गई है। हालांकि, मैं इसे अपने अभिनय का हिस्सा मानता हूं।
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