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    आजमगढ़ में प्रभारी DIOS के विरुद्ध दर्ज हुआ मुकदमा:संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की नियम विरुद्ध अनुमोदन पर की गई शिकायत

    9 hours ago

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    आजमगढ़ जिले के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक रहे उपेंद्र कुमार पर 25 लाख रुपए रिश्वत लेने का मामला अभी ठंड भी नहीं हुआ कि आजमगढ़ के प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक के विरुद्ध भी शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिले के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक रहे उपेंद्र कुमार पर वेतन दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। जिसको लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में जमकर हंगामा भी हुआ था। इस मामले की रिपोर्ट जिले के डीएम रविंद्र कुमार ने शासन को भेज दी थी। जिसके आधार पर उपेंद्र कुमार का एक सप्ताह पहले प्रयागराज ट्रांसफर भी कर दिया गया था। जिले में श्री देव आनंद संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय दानशनिचरा रामगढ़, में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के नियमविरुद्ध अनुमोदन के मामले को लेकर शहर कोतवाली में मुकदमा देर रात दर्ज कर लिया गया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़ मण्डल नवल किशोर की तहरीर पर प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) आजमगढ़ वीरेन्द्र प्रताप सिंह के विरुद्ध शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शासन स्तर पर लंबित है मामला संयुक्त शिक्षा निदेशक के दिए तहरीर में उल्लेख है कि विद्यालय में रिकी यादव (प्रधानाचार्य), प्रियंका (साहित्य) और अल्का त्रिपाठी (साहित्य) के अनुमोदन की कार्यवाही उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अधिनियम-2000 तथा विनियमावली-2009 के प्रावधानों का पालन किए बिना की गई। यह विद्यालय फिलहाल अनुदान सूची से बाहर है और अनुदान बहाली का मामला शासन स्तर पर लंबित है। जांच में सामने आया है कि विद्यालय को वर्ष 2015 में अनुदान में शामिल किया गया था। लेकिन 2016 में शिकायतों के बाद अनुदान रोक दिया गया। वर्तमान में विद्यालय प्रबंधन द्वारा अनुदान बहाली के लिए शासन को प्रत्यावेदन दिया गया है, जिस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके बावजूद प्रभारी DIOS द्वारा मात्र विद्यालय प्रबंधक के पत्र के आधार पर अनुमोदन कर दिया गया। जिसे अधिकार क्षेत्र से बाहर और नियमों के विपरीत माना गया है। प्रभारी DIOS के अनुसार संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक विधिचन्द यादव द्वारा गुमराह कर हस्ताक्षर कराए गए। वहीं, प्रधान सहायक ने अपने स्पष्टीकरण में किसी भी प्रकार की भूमिका से साफ इनकार किया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने दोनों स्पष्टीकरणों का अवलोकन करने के बाद पाया कि पहले अनुमोदन जारी किया गया और फिर उसे निरस्त किया गया, जो गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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