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    आउटसोर्सिंग कर्मियों को हटाने का आदेश निरस्त:मेरठ मंडल के विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी सेवा जारी रहेगी

    2 hours ago

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    मेरठ मंडल के सहायता प्राप्त माध्यमिक राजकीय हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 31 मार्च के बाद सेवा से हटाने का आदेश निरस्त कर दिया गया है। यह निर्णय कर्मचारियों के सामने उत्पन्न आर्थिक और मानसिक समस्याओं के निस्तारण के संबंध में लिया गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। वें कमिश्नरी पार्क में एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। मेरठ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय द्वारा 13 फरवरी 2026 को जारी एक पत्र में 31 मार्च 2026 के बाद इन कर्मचारियों से कार्य न लेने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के कारण हजारों कर्मचारियों के सामने बेरोजगारी और परिवार के लिए आर्थिक संकट की समस्या खड़ी हो गई थी। कर्मचारियों को मैन पावर आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा दिए जाने वाले मासिक वेतन 8314 रुपये पर 18 प्रतिशत जीएसटी (1994-15 रुपये) लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त, कई-कई माह तक वेतन का भुगतान समय पर न होने से भी कर्मचारियों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शासनादेश के अनुसार, विद्यालय के समीप के स्थानीय निवासी को नौकरी में वरीयता दी जानी चाहिए, लेकिन कंपनी प्रदाता इसका पालन नहीं कर रहे हैं। कर्मचारियों को 30 से 50 किलोमीटर दूर नियुक्त किया जाता है, जिससे 8314 रुपये के वेतन में वाहन व्यय अधिक हो जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और मनमानी की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, कंपनी प्रदाताओं पर साक्षात्कार की आड़ में बेरोजगार नौजवानों से एक लाख से लेकर दो लाख रुपये तक की ठगी करने का आरोप है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। आउटसोर्सिंग कंपनी प्रदाताओं द्वारा कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और बीमा कटौती के बावजूद उन्हें नंबर या कार्ड जारी नहीं किए जाते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 सितंबर 2025 को कैबिनेट बैठक में निगम गठन का प्रस्ताव स्वीकृत किया था और 20 सितंबर 2025 को शासनादेश भी जारी हुआ था, लेकिन यह निगम अभी तक अस्तित्व में आकर कार्य शुरू नहीं कर पाया है।
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