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    अब गांव की महिलाएं तय करेंगी पानी की क्वालिटी:फील्ड टेस्टिंग किट से बदल रही यूपी के गांवों की सूरत, हर टेस्ट पर सरकार देगी मानदेय

    5 hours ago

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    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 'जल जीवन मिशन' के तहत चलाए जा रहे फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) अभियान को ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी नियमित कमाई का एक बड़ा जरिया बना दिया है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाओं को इस अभियान से जोड़कर न केवल स्वच्छ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से भी आत्मनिर्भर बनाया गया है। गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के बदले मिलने वाले मानदेय से ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के नए रास्ते खुल गए हैं। हर ग्राम पंचायत में 5-5 महिलाओं की 'स्पेशल-5' टीम नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि इस मिशन के तहत प्रदेश की लगभग सभी ग्राम पंचायतों और राजस्व गांवों में 5-5 महिलाओं के समूह को फील्ड टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में प्रदेश के करीब 97,070 गांवों में ये प्रशिक्षित महिलाएं पूरी सक्रियता से काम कर रही हैं। ये महिलाएं अपने-अपने इलाकों में पेयजल स्रोतों और घरों के नलों से पानी के सैंपल लेकर नियमित जांच कर रही हैं। इस चालू वित्तीय वर्ष (Financial Year) में अब तक रिकॉर्ड 63,700 जल नमूनों का परीक्षण पूरा किया जा चुका है। पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार खत्म, तुरंत होगा एक्शन पहले गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के लिए सैंपल को लैब भेजने और रिपोर्ट आने का लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा रहता था। लेकिन अब: ग्राम स्तर पर ये महिलाएं एफटीके (FTK) के जरिए पाइपलाइन और ट्यूबवेल के पानी में मौजूद हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया का तुरंत पता लगा लेती हैं। पानी दूषित मिलते ही विभाग को तुरंत सूचना दी जाती है, जिससे दूषित पानी की सप्लाई रोककर समय रहते गंभीर बीमारियों से ग्रामीणों को बचाया जा रहा है। अतिरिक्त आय का जरिया: प्रति जांच मिलेंगे ₹20 यह कार्यक्रम सिर्फ सेहत सुधारने का ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी एक बेहतरीन जरिया बन गया है। टेस्टिंग कार्य से जुड़ी इन महिलाओं को उनके काम के बदले तय दरों के अनुसार सीधे उनके खाते में भुगतान किया जा रहा है। महिलाओं को प्रति जांच 20 रुपये की दर से अधिकतम 20 जांच के लिए 400 रुपये का भुगतान मिल रहा है। ग्रामीण परिवेश में घरेलू कामकाज के साथ यह व्यवस्था महिलाओं के लिए घर बैठे अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। हाईटेक हुईं ग्रामीण महिलाएं: मोबाइल ऐप पर दर्ज हो रही रिपोर्ट महिलाओं को इस काम में पूरी तरह एक्सपर्ट बनाने के लिए 'जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस कार्यक्रम' के तहत विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी गई है। इस ट्रेनिंग में महिलाओं को इन मुख्य बिंदुओं पर तैयार किया गया है: किट का सही इस्तेमाल: फील्ड टेस्टिंग किट को बिना किसी गलती के सही तरीके से संचालित करना। सुरक्षित कलेक्शन: अलग-अलग पेयजल स्रोतों से पानी के सैंपल को सुरक्षित तरीके से इकट्ठा करना। पैरामीटर्स की समझ: पानी के भीतर छुपे फ्लोराइड, आर्सेनिक जैसे विभिन्न हानिकारक पैरामीटर्स की बारीकी से जांच करना। डिजिटल रिपोर्टिंग: पानी की जांच के बाद मिलने वाले नतीजों को रजिस्टर के साथ-साथ सीधे मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन दर्ज करना।
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