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    चैटबॉट्स के सुझाव से चेहरे के मेकओवर का ट्रेंड:चेतावनी-खर्च के बाद भी आदर्श चेहरे की गारंटी नहीं; सर्जन बोले- असल में करना जानलेवा

    6 hours ago

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    ब्रिटेन के जाने-माने लेखक और पत्रकार इसाक टॉम्पकिंस ने अपने फोन के कैमरे से एक सामान्य सी सेल्फी ली और उसे एक एआई चैटबॉट को सौंप दिया। कहा-‘मुझे थोड़ा और सुंदर बना दो।’ कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर ऐसा चेहरा उभर आया जो था तो उनका ही, लेकिन उसमें जादुई कशिश थी। उसकी नाक बिल्कुल सीधी थी और पलकें थोड़ी उठी हुई थीं। इसाक यह तस्वीर लेकर लंदन के मशहूर कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. एलेक्स कारिडिस के पास पहुंचे, तो डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बदलाव तो मामूली है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने का खर्च करीब 25 लाख रुपए आएगा।’ इसाक का यह प्रयोग उस कड़वी हकीकत को बयां करता है, जिससे दुनियाभर के प्लास्टिक सर्जन जूझ रहे हैं। इस नए चलन को ‘एआई फेस’ नाम दिया गया है। ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स की प्रेसिडेंट नोरा नुजेंट बताती हैं कि उनके क्लीनिक में रोज ऐसे मरीज आते हैं, जो चैटबॉट्स द्वारा बनाई गई अवास्तविक तस्वीर लेकर जिद करते हैं कि उन्हें वैसा ही दिखना है। उनकी मांग होती है... कांच जैसी बेदाग त्वचा, तराशी हुई गालों की हड्डियां और चेहरे में ऐसी समरूपता जो इंसानी शरीर में प्राकृतिक रूप से संभव ही नहीं है। इसाक यहीं नहीं रुके। उन्होंने चैटबॉट से इंटरनेट का सबसे हैंडसम व मर्दाना लुक देने को कहा। एआई ने जो तस्वीर बनाई, उसे देखकर डॉ. कारिडिस भी हैरान रह गए। चैटबॉट ने भारी जबड़े की सर्जरी, गालों की चर्बी हटाने और कई इम्प्लांट्स लगाने की सलाह दी। डॉक्टर ने गंभीर होकर कहा,‘यह बेतुका और डरावना है। इस काल्पनिक चेहरे के लिए 1 करोड़ रुपए खर्च करना होंगे, फिर भी गारंटी नहीं कि तुम ऐसे ही दिखोगे। उल्टा उम्र बढ़ने के साथ असली चेहरा भी बिगड़ जाएगा।’ डॉ. जूलियन कहते हैं,‘बीते दिनों एक वीडियो में डॉक्टर दावा करते दिखे कि सर्जरी से मरीज 30 साल छोटा दिखेगा। पर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि मरीज के हाथ में छह अंगुलियां थीं। स्पष्ट था कि इसे एआई द्वारा बनाया गया था। डॉ. जूलियन कहते हैं,‘खूबसूरत दिखना हर किसी की चाहत है, पर इंसानी शरीर पिक्सल नहीं; एआई के भ्रमजाल से स्थायी घाव हो सकते हैं। जिसे कोई सर्जन सुधार नहीं सकता।’ स्क्रीन पर ​पिक्सल बदलना आसान, सर्जरी में इस स्तर पर काम मुश्किल डॉ. कारिडिस का कहना है कि एआई कंप्यूटर स्क्रीन पर एक-एक पिक्सल को मर्जी से बदल सकता है, पर सर्जरी इस सूक्ष्म स्तर पर काम नहीं करती। वहीं, डॉ. जूलियन डी सिल्वा इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बताते हैं कि किसी व्यक्ति की एक आंख दूसरी आंख से कुछ मिलीमीटर ऊपर-नीचे है, तो एआई उसे एक सेकंड में ठीक कर देगा। पर हकीकत में आंखें खोपड़ी की हड्डी के खांचे में टिकी होती हैं, जिसके ठीक पीछे दिमाग होता है। सर्जरी से उन हड्डियों को हिलाना जानलेवा हो सकता है।
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