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    अलीगंज अग्निकांड में 87 दिन बाद चार्जशीट:500 से ज्यादा पन्नों में सुरक्षा खामियां, भवन स्वामी समेत 4 आरोपी, एक फरार

    7 hours ago

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    लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के मामले में पुलिस ने 87 दिन बाद कोर्ट में 500 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय, तुषांक कृष्ण जायसवाल और स्टूडियो संचालक सुरेश कुमार साहू को आरोपी बनाया गया है। एक आरोपी सुरेंद्र अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पांच पॉइंट में समझिए चार्जशीट में क्या है 1. फायर एग्जिट की जगह लिफ्ट लगाई गई जांच में सामने आया कि जहां फायर एग्जिट के लिए आपातकालीन सीढ़ियां होनी चाहिए थीं, वहां लिफ्ट लगा दी गई थी। इससे आग लगने पर ऊपरी मंजिलों से बाहर निकलने का दूसरा सुरक्षित रास्ता नहीं था। एसआईटी ने इसे ज्यादा लोगों की मौत की अहम वजहों में शामिल किया है। 2. आने-जाने का एक ही रास्ता, इमरजेंसी गेट भी नहीं भवन में आने-जाने के लिए मुख्य रूप से एक ही रास्ता था। अलग इमरजेंसी गेट नहीं था। धुआं बाहर निकालने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आग के बाद धुआं तेजी से फैला और अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। 3. 20 किलोवाट की मंजूरी, खपत 35 किलोवाट से ज्यादा भवन में 20 किलोवाट बिजली कनेक्शन की मंजूरी थी। जांच में बिजली की वास्तविक खपत 35 किलोवाट से ज्यादा मिली। अतिरिक्त लोड को आग तेजी से फैलने की संभावित वजह माना गया है। एसी के आउटर यूनिट और दूसरे बिजली उपकरणों की व्यवस्था भी असुरक्षित मिली। 4. विद्युत सुरक्षा एनओसी पर भी सवाल भवन मालिक की ओर से दी गई विद्युत सुरक्षा एनओसी की जांच की गई। विभागीय रिकॉर्ड में एनओसी का पत्रांक और डिस्पैच नंबर नहीं मिला। दस्तावेज के हस्ताक्षर, फॉन्ट, लिखावट और पेपर डिजाइन में भी अंतर पाया गया। इसके बाद भवन मालिक पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल करने का अलग केस दर्ज किया गया। 5. भवन की मंजूरी और निगरानी पर भी सवाल जांच सिर्फ भवन मालिक और संचालकों तक सीमित नहीं रही। कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम, एलडीए, फायर विभाग और दूसरे संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका भी जांची गई। एसआईटी की रिपोर्ट में भवन की मंजूरी और निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे थे। एलडीए ने भी मंजूरी से ज्यादा निर्माण होने की बात सामने रखी थी। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 125 और 3(5) और यूपी फायर सर्विस एक्ट की धारा 6 और 10 में चार्जशीट दाखिल की है। एक आरोपी सुरेंद्र अभी फरार है। उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित है। 22 जून को ऐसे हुआ था हादसा 22 जून की दोपहर अलीगंज सेक्टर-डी के तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में आग लग गई थी। शुरुआती जांच के मुताबिक आग बेसमेंट में चल रही पेट शॉप के हिस्से से शुरू हुई थी। कुछ ही देर में आग ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। हादसे के समय भवन में करीब 35 लोग मौजूद थे। आग और धुआं फैलने के बाद कई लोग अंदर फंस गए। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी। कुछ लोग बाथरूम में बंद होकर धुएं से बचने की कोशिश करते रहे। दमकल की टीमों ने पीछे की दीवार तोड़कर लोगों को बाहर निकाला। मौके पर करीब 14 एंबुलेंस पहुंचीं। घायलों को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। वहां 15 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 9 लोग घायल हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सभी 15 लोगों की मौत धुएं में दम घुटने से हुई थी।
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