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    अलीगढ़ नगर आयुक्त पर अवमानना की तलवार:18 करोड़ के जमीन घोटाले के मामले में 10 साल से हाजिर नहीं होने पर दिए आदेश

    7 hours ago

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    अलीगढ़ में 18 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन की बिक्री के मामले में अब तलवार नगर आयुक्त पर भी लटक गई है। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने 10 साल से कोर्ट में हाजिर न होने पर वादी पक्ष को दो दिन में गिरफ्तारी वारंट की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश जारी किए हैं। उधर, इस मामले में नगर निगम के संपत्ति विभाग के बाबू ने दो दिन पहले सरकारी जमीन की बिक्री के मामले में पूर्व जेई गय्यूर अहमद के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी है। समझौते के नाम पर 'खेल' और 10 साल की खामोशी ​पूरा विवाद कोल तहसील के भुजपुरा इलाके की करीब 31 बीघा जमीन से जुड़ा है। इसे 1946-47 में ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए अधिग्रहित किया गया था। इस सरकारी जमीन को लेकर 1991 में कानूनी लड़ाई शुरू हुई। आरोप है कि साल 2002 में तत्कालीन नगर आयुक्त और वादी ओम प्रकाश शर्मा के बीच एक समझौता हुआ, जिसके आधार पर कोर्ट ने डिक्री पारित कर दी। इस समझौते के तहत सरकारी जमीन का एक बड़ा हिस्सा निजी पक्ष को दे दिया गया। समझौते के बाद पलटा विभाग समझौते के बाद भी नगर निगम ने उस जमीन का नामांतरण अपने नाम करा लिया। इसे कोर्ट ने डिक्री की अवमानना माना। साल 2016 में कोर्ट ने नोटिस जारी कर 30 दिन में स्थिति बहाल करने को कहा था, लेकिन निगम प्रशासन टालमटोल करता रहा। 16 फरवरी को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में हाजिर होने के बाद भी नगर आयुक्त उपस्थित नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने वादी को दो दिन में नगर आयुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की विधिक प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं। पहले के अधिकारियों ने किया फर्जीवाड़ा इस संबंध में नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार का बड़ा खेल करार दिया है। उनका कहना है कि वे अपने कदम पर कायम हैं और झुकेंगे नहीं। पूर्व के अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर और फर्जीवाड़ा करके करोड़ों की सरकारी जमीन निजी लोगों के नाम कर दी थी। निगम प्रशासन ने अब इस मामले में तत्कालीन संपत्ति अधिकारी और अवर अभियंता गयूर अहमद के खिलाफ सिविल लाइन थाने में तहरीर दी है। ​नगर आयुक्त का कहना है कि वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला न्यायालय और हाईकोर्ट में अपील कर चुके हैं और अब उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार है। उन्होंने साफ किया कि नगर निगम की संपत्ति जनता की संपत्ति है और इसे किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
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