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    तहरीर,जनसुनवाई और मौत… फिर भी 5 दिन चुप रही पुलिस:जातिसूचक गाली का विरोध बना जानलेवा, अब देरी से दर्ज हत्या का मुकदमा चर्चा में

    1 hour ago

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    सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु थाना क्षेत्र में संतोष की मौत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। 14 फरवरी को लाठी से घायल हुए संतोष की 19 फरवरी को इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन हत्या का मुकदमा 20 फरवरी को दर्ज हुआ। परिजनों का आरोप है कि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो शायद संतोष की जान बच सकती थी। मृतक संतोष के पिता नाजिर के मुताबिक, 14 फरवरी को संतोष चिल्हिया से मछली बेचकर घर लौट रहा था। बजहा पुल के पास गांव के एक व्यक्ति ने उसे जातिसूचक गालियां दीं। संतोष ने विरोध किया तो आरोपी ने लाठी से उसके सिर पर वार कर दिया। वह मौके पर ही बेहोश हो गया। परिजन उसे सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से गंभीर हालत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया। तहरीर दी, शिकायत की… फिर भी चुप रही पुलिस नाजिर का आरोप है कि उन्होंने 17 फरवरी को बजहा चौकी में तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर तो ली] लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया। कार्रवाई की मांग पर टालमटोल होता रहा। इसके बाद उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर पुलिस अधीक्षक को ऑनलाइन शिकायत भी भेजी, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। खबर छपी, उसी दिन मौत 19 फरवरी को दैनिक भास्कर ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए खबर प्रकाशित की। उसी शाम बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान संतोष की मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। दबाव में दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा ग्रामीणों के विरोध के बाद 20 फरवरी को पुलिस ने हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। लेकिन अब बड़ा सवाल यही है—17 फरवरी को तहरीर मिलने के बावजूद मुकदमा क्यों नहीं लिखा गया? नामजद आरोपियों की जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई में 5 दिन की देरी क्यों हुई? क्या पुलिस किसी दबाव में थी? कानूनी जानकारों का कहना है कि सिर पर लाठी से वार जैसे गंभीर मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है, ताकि समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी हो सके। पिता बोले – “अब न्याय चाहिए” मृतक के पिता नाजिर का कहना है- "हमने समय से तहरीर दी, जनसुनवाई में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब मेरे बेटे की मौत हो गई, तब जाकर हत्या की धारा लगी। हमें न्याय चाहिए और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए।"
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