Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Allahabad High Court ने आकृति चौधरी पर NSA रद्द किया, 5 लाख का हर्जाना ठोका

    12 hours ago

    1

    0

    प्रयागराज, सात सितंबर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा 24 वर्षीय आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जिस तरह से हिरासत का आदेश पारित किया गया, उसकी भी कड़ी आलोचना की। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि रासुका के तहत चौधरी को लगातार जेल में रखने से अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ क्योंकि हिरासत का आदेश और उसके आधार, ठोस जानकारी से रहित हैं।खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि मनमानी करने वाली नौकरशाही का लगातार तानाशाही भरा रवैया उत्तर प्रदेश को एक ऐसे दमनकारी समाज में बदल सकता है जहां हर चीज पर कड़ी निगरानी हो। अदालत ने चौधरी को पांच लाख रुपये मुआवजा भी देने का निर्देश दिया और यह भी कहा कि यह रकम गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम और एसएचओ स्तर तक के अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए जिन्होंने हिरासत का आदेश पारित किया। आकृति चौधरी को अप्रैल, 2026 में नोएडा में कामगारों के विरोध प्रदर्शन से उपजे मामलों में गिरफ्तार किया गया था और बाद में प्रदेश सरकार ने 13 मई को चौधरी और पत्रकार सत्य वर्मा के खिलाफ रासुका लगा दिया था।अदालत ने दो सितंबर को अपने 15 पन्नों के आदेश में कहा कि अधिकारियों को बहुत अधिकार दिए जाते हैं क्योंकि नागरिकों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों, गरिमा, सम्मान और कल्याण को बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। हालांकि अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी निष्ठा संविधान के प्रति है ना कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति। आदेश में यह भी कहा गया कि अधिकारी जनता के सेवक होते हैं और लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है।अदालत ने चेतावनी दी कि जब नौकरशाह और पुलिस अधिकारी अपनी शपथ को नजरअंदाज करते हैं और उसके उलट काम करते हैं तो लोग उन्हें ब्रिटिश शासन की दमनकारी निशानी के तौर पर देख सकते हैं जिससे नागरिकों में अशांति का माहौल बन सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस वजह या उचित प्रक्रिया के नागरिक स्वतंत्रताओं का उल्लंघन करने वाली ज्यादतियों या गैर कानूनी कार्यों को सुधारते समय, न्यायपालिका पीड़ित नागरिकों को मुआवजा दिलाने के लिए कड़े आदेश दे सकती है। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में पुलिस रिपोर्ट में बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोप लगाए गए थे, वहां जिला मजिस्ट्रेट से यह उम्मीद की जाती थी कि वह रासुका के कड़े प्रावधान लागू करने का निर्णय करने से पूर्व रिकॉर्ड की जांच कर लें।इस मामले में गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट का आचरण उपहास योग्य है। चौधरी एक छात्रा और कार्यकर्ता थी जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और ऐसी कोई सामग्री नहीं पेश की गई जिससे प्रदर्शित होता हो कि उसने हिंसा भड़काई। अदालत ने चौधरी की गिरफ्तारी के संबंध में गंभीर विसंतगियां भी पाईं।उनके मामले में उन्हें 11 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे नोएडा में बॉटिनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने कहा कि उसे 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि चौधरी और उसके साथियों ने हिंसा भड़काने का षड्यंत्र रचा।वहीं, व्हाट्सऐप संदेशों की जांच के दौरान अदालत ने बार बार सरकार से उन सामग्री को पेश करने को कहा जिनसे प्रदर्शित होता हो कि चौधरी ने लोगों को हिंसा के लिए भड़काया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार एक भी संदेश या वीडियो क्लिप नहीं दिखा सकी जिसमें हिंसा भड़काने की बात उजागर होती हो।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Rajasthan निकाय चुनाव में Congress को जिताने के लिए Ashok Gehlot ने जनता से की अपील
    Next Article
    Swachh Vayu Sarvekshan में Lucknow अव्वल, Rourkela और कलिंग नगर ने भी मारी बाजी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment