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    ललितपुर साइबर पुलिस ने अंतरराज्यीय ठग गिरोह का खुलासा किया:इंदौर से 2 महिलाओं समेत 13 गिरफ्तार, फर्जी ऐप से शेयर मार्केट में ठगी करते थे

    10 minutes ago

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    ललितपुर साइबर क्राइम टीम ने अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह फर्जी कॉल सेंटर चलाकर 'नोकिया सिक्योरिटीज' नाम की फर्जी वेबसाइट और ऐप के जरिए लोगों को शेयर मार्केट में निवेश का झांसा देता था। इसके बाद निवेश पर भारी मुनाफा दिखाकर करोड़ों रुपए की ठगी की जाती थी। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 13 आरोपियों को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। निवेश की रकम और मुनाफा दिखाकर फंसाते थे ललितपुर के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार वाजपेयी ने मंगलवार दोपहर 1 बजे प्रेसवार्ता में गिरोह का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि आरोपी फर्जी वेबसाइट और ऐप के जरिए शेयर ट्रेडिंग व स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पीड़ितों को ऐप और वेबसाइट पर उनकी जमा रकम के साथ अत्यधिक मुनाफा दिखाया जाता था। जब पीड़ित अपनी रकम निकालने की कोशिश करते थे तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर दोबारा रकम जमा कराई जाती थी। इस तरह अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे लगातार पैसे ऐंठे जाते थे। 6,357 संभावित पीड़ितों का डेटा बरामद एसपी ने बताया कि आरोपियों के पास मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में मुकदमे से जुड़े पीड़ितों का डेटा और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। प्रारंभिक तकनीकी और डिजिटल जांच में करीब 6,357 संभावित पीड़ितों से संबंधित डेटा बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कोई वेबसाइट डिजाइन कराता था, तो कोई कॉलिंग करता था। इसके अलावा फर्जी सिम और बैंक खातों की व्यवस्था करने के साथ ठगी की रकम निकालने का काम भी अलग-अलग सदस्य करते थे। फर्जी सिम और बैंक खातों से चलाते थे पूरा नेटवर्क पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन में इस्तेमाल सिम कार्ड फर्जी पाए गए हैं। इन सिम को अलग-अलग बैंक खातों से लिंक किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस व्यवस्था का मकसद ठगी के मामले दर्ज होने पर वास्तविक आरोपियों के बजाय सिम और बैंक खातों के मालिकों तक जांच को सीमित रखना था। प्रारंभिक जांच में पुलिस को करीब 600 म्यूल बैंक खाते मिले हैं। इन खातों में साइबर ठगी की रकम जमा की जाती थी। इसके बाद रकम को डिजिटल करेंसी और अन्य माध्यमों से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर घुमाया जाता था। जानिए क्या होता है म्यूल अकाउंट म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता होता है जो किसी आम व्यक्ति के नाम पर खुला होता है, लेकिन उसका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध तरीके से ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे को ट्रांसफर या छिपाने के लिए करते हैं डिजिटल करेंसी के जरिए रकम को खपाते थे पुलिस के मुताबिक, गिरोह ठगी की रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय डिजिटल करेंसी और अन्य माध्यमों से इधर-उधर ट्रांसफर करता था। इस नेटवर्क के जरिए आरोपियों ने करोड़ों रुपए की ठगी कर अवैध मुनाफा कमाया। पुलिस अब बरामद डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और पीड़ितों के डेटा की विस्तृत जांच कर रही है। जांच के आधार पर ठगी की कुल रकम और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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