Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अमेरिका ने टॉयलेट पेपर से भी बदतर हमारा...खुलासे ने उड़ाए होश!

    3 hours from now

    1

    0

    आज पाकिस्तान में टॉयलेट पेपर वायरल है। सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से यह ट्रेंड कर रहा है। दरअसल पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में टॉयलेट पेपर को लेकर के मिसालें दी गई हैं। पाकिस्तान की तुलना टॉयलेट पेपर से की गई है और वो भी पाकिस्तानी हुकूमत के एक नुमाइंदे के जरिए। आखिर क्यों और कैसे? आप खुद देखिए। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में खड़े होकर शहबाज सरकार के नुमाइंदे और मुल्ला मुनीर के तोते यानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कुछ ऐसा खुलासा किया जिसे सुनने के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तान की थू थू होने लगी क्योंकि ख्वाजा आसिफ ने दशकों से चलते आ रहे अमेरिका पाकिस्तान के रिश्ते पर यह दावा किया कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान टॉयलेट पेपर की तरह है जिसका इस्तेमाल वो गंदगी साफ करने के लिए करता है और फिर इस्तेमाल होने के बाद कूड़ेदान में फेंक देता है।  इससे ज्यादा बेइज्जती और शर्म की बात क्या हो सकती है जब किसी मुल्क का नुमाइंदा ही अपने देश को टॉयलेट पेपर बता रहा हो।इसे भी पढ़ें: जो देश में आतंक फैलाए, उससे Cricket क्यों? India-Pakistan मैच पर बोलीं Priyanka Chaturvediपाकिस्तानी कैमरे पर आकर मुनीर को कोसने लगे। पहले तो नहीं भाईजान लेकिन अब तो ख्वाजा आसिफ क्या बल्कि पूरा पाकिस्तान समझ रहा है उसके दशकों से अमेरिका उसका इस्तेमाल करता रहा और आगे भी करता रहेगा वो भी टॉयलेट पेपर की तरह और पाकिस्तान के हुक्मरान हाथ जोड़कर खड़े रहेंगे भीख का कटोरा लिए। जैसे आज की तारीख में ट्रंप पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह यूज़ कर रहा है और फेंक रहा है वैसे ही पाकिस्तान का इस्तेमाल वो हमेशा करता रहेगा। और मुनीर जैसे आज सब कुछ खड़े-खड़े देख रहा।  खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोल रहे हैं वो भी नेशनल असेंबली में। जिस तरह भारत में लोकसभा होती है। वहां पे नेशनल असेंबली है। ख्वाजा यहीं नहीं रुके। उन्होंने पाकिस्तान की संसद के अंदर सब कुछ खुलकर बोला है। ये बातें नई नहीं है। इसे जानता तो हर सियासतदा है। बस ऐसे खुलकर बोलता नहीं है। अपनी फजीहत खुद नहीं पालता। लेकिन जहां ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका का नाम लिया वहां वो अपने दूसरे हमदर्दों को भूल गए। चाहे चीन हो या अरब देश। इन सब ने जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का बखूबी इस्तेमाल किया।इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor का 'हीरो' था Rafale, Pakistan में मचाई थी तबाहीरक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में जो जंग लड़ी थी वो धर्म के लिए नहीं अमेरिका के लिए थी।  1947 में पाकिस्तान ने अपने गठन के साथ ही भारत को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मान लिया था। विदेश नीति से लेकर डिफेंस पॉलिसी तक सब कुछ उसी हिसाब से लिखा जाने लगा था क्योंकि उसको कश्मीर पे हक चाहिए था। उसको हथियाना था। इसके लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को एक बड़े भाई की तरह देखा जो उसे हथियार से लेकर पैसे तक सब दे सकता था। लिहाजा पाकिस्तान ने सुरक्षा और सेना के मामलों में अमेरिका का साथ पकड़ लिया। अमेरिका को पाकिस्तान में एशिया का वो साथी दिखा जिसका इस्तेमाल सोवियत संघ को काउंटर करने के लिए किया जा सकता था। शुरुआत 1956 में हुई। पाकिस्तान ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को पेशावर में अपना यू टू जासूसी बेस चलाने की बनाने की इजाजत दे दी ताकि वहां से सोवियत संघ की हरकतों पे नजर रखी जा सके। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को उचित सम्मान नहीं देता: Pak रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा कबूलनामावियतनाम और ईरान में मात खाने के बाद अमेरिका रूस को मजा चखाना चाहता था। इसके लिए जरिया बना पाकिस्तान। पाकिस्तान की लोकेशन ऐसी है कि वो साउथ एशिया, सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच पड़ता है। इसलिए अमेरिका ने उसे एक तरह से बेस की तरह इस्तेमाल किया और उस समय अफगानिस्तान में जो लड़ाके सोवियत सेना के खिलाफ लड़ रहे थे उन्हें फेनिंग, पनाह और हथियार पहुंचाने में पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने मदद भी की। बदले में पाकिस्तान को अरबों डॉलर की मदद और हथियार मिले। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    Prabhasakshi NewsRoom: UN Report ने खोली पाकिस्तानी आतंक की परतें, Red Fort Car Blast में आया Jaish-e-Mohammed का नाम
    Next Article
    Trump-Netanyahu में हुई मीटिंग, ईरान पर बनी क्या सीक्रेट रणनीति?

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment