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    अमिताभ बच्चन ने प्रतापगढ़ वालों से माफी मांगी:KBC पर बोले- हम लाइब्रेरी खोल देंगे; 20 साल से किताबों का इंतजार कर रही बिल्डिंग

    4 hours ago

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    प्रतापगढ़ में हरिवंश राय बच्चन के नाम पर बनी लाइब्रेरी 20 साल भी शुरू नहीं हो पाई है। जया बच्चन ने इस लाइब्रेरी का लोकार्पण किया था। उन्होंने बेटे-बहू और पति अमिताभ बच्चन के साथ गांव आने का वादा भी किया था। लेकिन, यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति (KBC) के मंच पर अमिताभ बच्चन ने इस बात को लेकर माफी मांगी। कहा- आप लोग घबराइए नहीं, जल्द ही लाइब्रेरी शुरू होगी। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर बाबूपट्‌टी पहुंची। गांववालों से बात की। उनका कहना है कि अमिताभ बच्चन के आने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन वो पहले भी KBC पर ऐसा वादा कर चुके हैं। इतने सालों में बिल्डिंग जर्जर हो गई और खिड़की-दरवाजे टूटने लगे हैं। अमिताभ बच्चन के पैतृक गांव से रिपोर्ट… कभी अपने गांव नहीं आए अमिताभ बच्चन रानीगंज तहसील में डॉ. हरिवंश राय बच्चन का पैतृक गांव बाबूपट्‌टी है। अमिताभ बच्चन आज तक यहां नहीं आए हैं। बच्चन परिवार की गांव में जो जमीन थी, उसे दान दे दिया गया था। उसी पर लाइब्रेरी बनाई गई है। 2004 में मछलीशहर से तत्कालीन सपा सांसद सीएन सिंह ने लाइब्रेरी बनाने के लिए अपनी निधि से 22 लाख रुपए दिए थे। 5 मार्च, 2006 को जया बच्चन और अमर सिंह ने गांव पहुंचकर लाइब्रेरी का लोकार्पण किया था। जया बच्चन ने चौरा देवी का आशीर्वाद लिया था जया बच्चन ने बहू के रूप में मां चौरा देवी स्थल पर माथा टेककर आरती उतारी थी। फिर परिवार की महिलाओं से भी मिली थीं। इसके बाद जया बच्चन ने गांववालों से कहा था कि बेटे अभिषेक बच्चन की शादी के बाद बहू ऐश्वर्या को साथ लेकर गांव आएंगी। इसके साथ ही गांव में एक बालिका डिग्री कॉलेज खुलवाने की भी बात कही थी। खिड़की-दरवाजे टूटे, बिल्डिंग जर्जर हुई तब गांववालों में उम्मीद जगी थी कि अमिताभ बच्चन अपने पैतृक गांव आएंगे। इससे गांव का विकास होगा। लेकिन, धीरे-धीरे यह उम्मीद कम होती चली गई। गांव में न कॉलेज खुला और न ही जया बच्चन बेटे-बहू को लेकर पहुंचीं। लाइब्रेरी की बिल्डिंग तो बन गई, लेकिन वहां किताबें कभी नहीं पहुंचीं। देख-रेख नहीं हुई, तो बिल्डिंग भी जर्जर होने लगी। खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं। फर्श भी टूट गई है। KBC के मंच पर पहुंचे थे चंद्र प्रकाश तिवारी शुक्रवार (2 अक्टूबर) को केबीसी के मंच पर अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर चंद्र प्रकाश तिवारी पहुंचे थे। चंद्र प्रकाश पट्टी तहसील के डड़वा महोखरी गांव के रहने वाले हैं। अमिताभ के पूछने पर चंद्र प्रकाश ने अपने गांव का नाम नहीं बताया। बल्कि, उन्होंने कहा कि वह बाबूपट्टी गांव के बगल के गांव के रहने वाले हैं। अमिताभ बोले- लाइब्रेरी हमारी पत्नी का विचार था बाबूपट्‌टी का नाम सुनते ही अमिताभ बच्चन ने कहा- यह हमारे पूर्वजों का जन्मस्थान था। बाबूजी वहीं से आए थे। हम वहां कुछ करना चाह रहे थे, लेकिन इसमें रुकावट हो गई। वहां के लोग बहुत नाराज हैं। प्रतापगढ़... बाबूपट्टी के लोगों से भैया हम माफी चाहते हैं। हम लाइब्रेरी खोल देंगे, आप घबराइए मत। हमारी पत्नीजी गई थीं वहां और उनका यह विचार था कि यहां पर बच्चों के लिए कोई पढ़ने की जगह नहीं है। क्यों न हम लोग एक लाइब्रेरी बनाकर दे दें। हम बोले ठीक है। बिल्डिंग-विल्डिंग बन गई, लेकिन खाली पड़ी हुई है। तो अब हम उसके अंदर कुछ भरेंगे। गांव के लोगों को अभी भी बिगबी के वादे पर भरोसा भले ही कई बार आश्वासन देने के बाद भी अमिताभ न पहुंचे हों, लेकिन गांववालों को अभी भी उनके वादे पर भरोसा है। बिगबी के वादे के बाद लोगों की धूमिल होती उम्मीदें फिर से जग गई हैं। गांव के लोगों में उत्साह है। ऋषभ बोले- KBC में बिगबी को गांव की याद आती है गांव के ऋषभ द्विवेदी ने बताया- जब अमिताभ बच्चन ने अपनी गलती मानी, तो गांववालों को गर्व हुआ। हालांकि, उन्हें माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं थी। जब भी केबीसी आता है, तभी अमिताभ बच्चन को गांव की याद आती है। शो में 3 बार पहले भी उन्होंने गांव आने और कुछ करने की बात कही, लेकिन बाद में कोई जवाब नहीं मिला। मैं पिछले 10 साल से ट्विटर, इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर अमिताभ बच्चन और उनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आता। पुरुषोत्तम बोले- बिगबी का स्वागत कर लें, तो धन्य हो जाएं पुरुषोत्तम द्विवेदी कहते हैं- अमिताभ ने आश्वासन तो बहुत दिए, लेकिन आए नहीं। अब मन में ग्लानि भी है कि इतनी बड़ी हस्तियां आश्वासन देती हैं, लेकिन परिणाम नहीं दिखता। इस बार 100% उम्मीद लग रही है कि वो आएंगे। हर चीज का समय-मुहूर्त होता है। एक बार उनका स्वागत हो जाए गांववालों की तरफ से, तो हम लोग धन्य हो जाएंगे। गांव के अमिताभ श्रीवास्तव का कहना है- अमिताभ बच्चन के आने की पूरी उम्मीद लग रही है। हमारे परिवार वाले बहुत खुशी मना रहे हैं। हो सकता है कि पहले कोई दिक्कत हो गई होगी, इसलिए नहीं आ सके। एक बार फिर से गांव के विकास की उम्मीद जगी महाराष्ट्र की संस्था 'डॉ. हरिवंश राय बच्चन प्रबोधन प्रतिष्ठान' ने 'मातृभूमि योजना' के तहत गांव को गोद लिया है। फर्स्ट फेज में गांव के डेवलपमेंट पर एक करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रतिष्ठान 1 करोड़ रुपए देगा, जबकि पंचायत राज विभाग 40 लाख रुपए मंजूर करेगा। पंचायत राज विभाग ने प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। अब प्रतिष्ठान से पैसे जमा होने का इंतजार है। पहले चरण में डॉ. हरिवंश राय बच्चन के नाम पर सीसी रोड, स्ट्रीट लाइटें और एक लाइब्रेरी बनाने का प्रस्ताव है। ग्राम प्रधान/प्रशासक विकास यादव की मानें, तो डॉ. हरिवंश राय बच्चन प्रबोधन प्रतिष्ठान के संस्थापक निवृत्ति यादव 11 अक्टूबर को बाबूपट्टी आ सकते हैं। करीब 15 दिन पहले यह जानकारी फोन पर निवृत्ति यादव की ओर से दी गई थी। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… कॉमेडियन को पकड़ने आधी रात दीवार कूदकर पहुंची सुल्तानपुर पुलिस; इंस्पेक्टर बोला- मेरी पावर समझ नहीं रहे सुल्तानपुर में अवधी गायक और कॉमेडियन संजय यदुवंशी को मारपीट के मामले में पकड़ने के लिए पुलिस सोमवार आधी रात उनके घर पहुंची। गेट पर ताला लगा था, तो पुलिसकर्मी दीवार फांदकर अंदर घुसे, लेकिन संजय घर पर नहीं मिले। इस दौरान उनके पिता, मां और भाई की पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हो गई। पढ़ें पूरी खबर…
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