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    'मथुरा में अन्याय के प्रतीक हटेंगे, न्याय की बांसुरी बजेगी':उडुपी पीठाधीश्वर बोले- अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा की बारी

    5 hours ago

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    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बुधवार को उडुपी के पेजावर अधोक्षज मठ के पीठाधीश्वर विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना की। द्वैत वेदांत परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ हुए अनुष्ठान में ब्रज की भक्ति और उडुपी की उपासना परंपरा का संगम दिखा। महाराजश्री अपने साथ करीब 800 वर्ष पुराने भगवान के चल-विग्रह लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचे थे। श्रीगर्भ गृह में तुलसी और पुष्पों से पूजन के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और पुष्पार्चन किया गया। पूजन के बाद उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान मृदंग, झांझ और मजीरों की मंगल ध्वनि के बीच हरिनाम संकीर्तन होता रहा। 800 साल पुराने चल-विग्रह के साथ पहुंचे श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीभागवत भवन में भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम और भगवान हयग्रीव के श्रीविग्रह के समक्ष पूजा की। उन्होंने तुलसी दल, कमल पुष्प समेत अन्य पूजन सामग्री से ठाकुरजी का पूजन किया। महाराजश्री अपने साथ जगद्गुरु माध्वाचार्य द्वारा पूजित करीब 800 वर्ष पुराने चल-विग्रह भी लेकर आए थे। श्रीगर्भ गृह में उन्होंने तुलसी और पुष्पों के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया और भगवान को पुष्प अर्पित किए। मंदिर निर्माण को लेकर बोले- अब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे पूजन के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने कहा कि सनातन के पवित्र स्थलों पर बने पुराने ढांचों से करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं और काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आध्यात्मिक स्वरूप को प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे। उनके अनुसार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरोत्थान का दौर शुरू हो चुका है। अन्याय और अत्याचार के प्रतीक हटेंगे तथा न्याय की बांसुरी बजेगी। मृदंग-झांझ की धुन पर परिसर में किया भ्रमण श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज का तुलसी-माला, पुष्पमाला और अंगवस्त्र से स्वागत किया। इसके बाद महाराजश्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन किया। मृदंग, झांझ और मजीरों की धुन के बीच परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।
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