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    अमिताभ ठाकुर दो महीने बाद देवरिया जेल से रिहा:गुपचुप तरीके से निकले, अधिकारियों को बोले- साहब... जल्दी गेट खुलवाइए

    3 hours ago

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    जबरिया रिटायर्ड IPS ऑफीसर अमिताभ ठाकुर दो महीने बाद जेल से रिहा हो गए। हालांकि दोबारा पकड़े जाने के डर से वे गुपचुप तरीके से देर शाम जेल से निकल गए। वे जेल से निकलने की इतनी हड़बड़ी में दिखे कि गेट खुलने में थोड़ी सी देरी होते देख, खुद ही बोले- साहब जल्दी गेट खुलवाइए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लखनऊ पुलिस ने अमिताभ ठाकुर को जेल से निकलते ही दोबारा दबोचने की योजना बनाई थी। टीम रात में देवरिया जेल भी पहुंची, पर उससे पहले ही अमिताभ ठाकुर परिजनों के साथ किसी गुप्त स्थान पर अंडरग्राउंड हो गए। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया न्यायालय के आदेश के अनुरूप ही संपन्न कराई गई। रिहाई की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई। बता दें कि 26 साल पुराने जमीन खरीद-फरोख्त के एक मामले में अमिताभ ठाकुर को 10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर में चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद देवरिया जेल भेज दिया गया था। 19 जनवरी को ही उनकी जमानत मंजूर हो गई थी, पर बॉन्ड प्रक्रिया के चलते रिहाई में देरी हुई। अब पूरा मामला विस्तार से समझ लीजिए... पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर बुधवार शाम देवरिया जिला कारागार, मदनपुर से रिहा हो गए। उन्हें 10 दिसंबर को सदर कोतवाली क्षेत्र के पूर्व औद्योगिक स्थल पर लगभग 6000 वर्गफीट भूमि आवंटन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 जनवरी को जिला जज की अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन जमानती कागजात और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने के कारण रिहाई टलती रही। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद न्यायालय से रिहाई आदेश जारी हुआ, जिसके आधार पर जेल प्रशासन ने उन्हें मुक्त किया। जेल गेट से कार में बैठकर सीधे रवाना, बात तक नहीं की रिहाई मिलते ही अमिताभ ठाकुर जेल गेट के बाहर पहले से मौजूद परिजनों के साथ एक चार पहिया वाहन में बैठकर रवाना हो गए। उन्होंने न तो मीडिया से बातचीत की और न ही किसी सार्वजनिक स्थल पर दिखाई दिए। उनके अचानक ओझल हो जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। उनके ठिकाने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। लखनऊ पुलिस की मौजूदगी पर सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि लखनऊ पुलिस की एक टीम पिछले कुछ दिनों से देवरिया में सक्रिय थी। न्यायालय परिसर और जिला कारागार के आसपास गतिविधियां देखे जाने तथा एक होटल के बाहर लखनऊ नंबर की पुलिस गाड़ी खड़ी होने की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इन दावों की किसी भी एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि संभावित कानूनी कार्रवाई की आशंका के चलते रिहाई के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आने से परहेज किया गया। जेल अधीक्षक राजकुमार वर्मा ने कहा- रिहाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश के अनुरूप और नियमों के तहत की गई है। प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी न्यायालय के निर्देशों का पालन करना है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या विशेष व्यवस्था नहीं हुई है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से किया गया है। जानिए किस मामले में कैसे जेल गए अमिताभ ठाकुर अमिताभ ठाकुर को 10 दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि 1999 में देवरिया के SP रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर औद्योगिक प्लॉट आवंटन में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और पद का दुरुपयोग किया। पत्नी के फर्जी नाम से जाली दस्तावेज तैयार करवाए थे। 10 दिसंबर 2025 को जब अमिताभ ठाकुर उन्हें लखनऊ एसी सुपरफास्ट ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, तभी सादी वर्दी में देवरिया, शाहजहांपुर और लखनऊ की संयुक्त पुलिस टीम पहुंची। शाहजहांपुर में जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पहुंची, पुलिस ने उन्हें ट्रेन से उतार लिया। अगले ही दिन उन्हें देवरिया जेल भेज दिया गया। ----------------------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… कानपुर लेम्बोर्गिनी केस- कारोबारी बेटे को बचाने की कोशिश नाकाम:कोर्ट में नहीं टिक सकी दलीलें; ड्राइवर ने सरेंडर किया, कोर्ट ने नहीं माना आरोपी कानपुर लेम्बोर्गिनी केस में कारोबारी बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम होती दिख रही है। तंबाकू कारोबारी ने पहले पुलिस को मैनेज किया। पैतरा एक्सपोज हुआ तो कोर्ट में ड्राइवर को सरेंडर कराया गया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी, उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कार अभी थाने में ही रहेगी। अब इस केस की सुनवाई 13 फरवरी को होगी। पढ़िए पूरी खबर…
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