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    अश्वमेघ महायज्ञ में सरयू किनारे शामिल हुए 10 हजार भक्त:अनवरत हवन, सामूहिक ध्यान और योग के साथ सत्संग का आकर्षण

    9 hours ago

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    सरयू किनारे बालू घाट पर अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम के तत्वाधान में आयोजित 9 दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ आकर्षण का केंद्र बन गया है। महायज्ञ में दूर दराज दिल्ली, मुंबई, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि प्रांतों के साथ थाईलैंड की धरती से चलकर आयेकरीब 10 हजार भक्त शामिल हो रहे हैं। मातृ भक्तों को मातेश्वरी परिवार के संस्थापक सद्गुरु महाराज ने भक्तों को उपदेश देते हुए बताया कि सम्पूर्ण धरा पर आदर्श वादी यदि बनना है तो भगवान राम की तरह बनाना चाहिए भगवान राम की तरह न कोई आदर्श वादी नहीं था धन्य है यह धरती जहाँ साक्षात भगवान राम जिन्होंने अपने अवतार के लिए चुना था जिन्होनें अपने आदर्श को स्थापित करने के लिए समस्त परिवार राज्य पाठ को छोड़कर जंगल में चले गए। उन्होंने कहा कि धन्य है लक्ष्मण जैसा भाई, धन्य है माँ सीता जो की एक राजनंदनी होते हुए भी अपने धर्म के लिए पति के साथ जंगल में चली गयी सम्पूर्ण जीवन कष्टो से भरा रहा हमें अपने जीवन में भगवान राम, लक्ष्मण, माँ सीता से सीख लेना चाहिए। हमें थोड़ा सा कष्ट हो जाता है तो घबरा जाते है धन के लिए क्या - क्या नहीं कर डालते है हमे अपने जीवन में माता पिता के प्रति क्या कर्तव्य है वह भगवान राम से भाई के साथ क्या कर्त्तव्य है लक्ष्मण से पति के साथ क्या कर्त्तव्य है मां सीता से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ठीक इसी तरह सास और बहू को भी एक दूसरे के प्रति क्या कर्तव्य है। उनको आपस में मां बेटी का भाव रखना चाहिए इस प्रकार हम सभी उस परम सत्ता के संतान हैं हमे आपस में प्रेम पूर्वक रहना चाहिए हमेशा जीवन में एक दूसरे की भलाई के बारे में सोचना चाहिए l कार्यक्रम में सुबह 5 बजे 6 बजे तक सद्गुरु महाराज द्वारा ध्यान योग दिया गया सभी मातृ भक्तों ने सुबह में ध्यान योग में बढ़ चढ़ कर भाग ले रहे हैं। महाराज ने सभी मातृ भक्तों को प्रति दिन सुबह में योगा करने पर विशेष बल दिया l सुबह 7 बजे से सामूहिक हवन कार्यक्रम किया जा रहा है। यज्ञ परिमंडल में एक मुख्य हवन कुंड बना हुआ है जो कि 24 घंटे लगातार अखंड रुप चल रहा है। मातेश्वरी के आचार्यो द्वारा बारी बारी से हवन किया जा रहा भक्तों के भोजन प्रसाद हेतु भंडार चल रहा है।
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