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    अतीक का बेटा अली बोला- अब भाई भी छोड़ गया:झांसी जेल में 2 रातों से नहीं सोया; खाना नहीं खाया

    6 hours ago

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    'मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई…।' ये 10 शब्द माफिया अतीक अहमद के छोटे अबान के हैं, जो उसने झांसी जेल पहुंचने से पहले एक दरोगा से फोन पर कहा था। इसके कुछ मिनट बाद ही अबान की मौत हो गई। अली को जब भाई के मौत की खबर मिली तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। बोला- ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया।’ वह पूरी रात करवटें बदलता रहा। रोता रहा। सामान्य दिनों में अली सुबह एक्सरसाइज करता था। कुछ लोगों से बातचीत भी करता था, लेकिन सदमे की वजह से वह कोठरी के अंदर ही कैद रहा। सुरक्षा जायजा लेने हर घंटे पहुंचने वाले जेल अफसरों से बार-बार वह हादसे के बारे में पूछता रहा। जेल सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह उसने सिर्फ हल्का नाश्ता किया। इसके बाद खाना खाने के लिए भी बाहर नहीं निकला। अबान गुरुवार को झांसी जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन दोस्त घायल हो गए। झांसी जेल में अबान लगभग हर हफ्ते मिलने आता था अली अपने छोटे भाई अबान को जी-जान से चाहता था। अबान भी उसे प्यार करता था। हर महीने करीब तीन-चार बार वह मिलता था। मुलाकात के दौरान LIU और सिपाही भी मौजूद रहते थे। सूत्र बताते हैं कि जैसे ही अली और अबान एक-दूसरे को देखते थे तो गले लग जाते थे। कुछ मिनटों तक वे ऐसे ही मिलते थे। सख्त पहरे में दोनों की मुलाकात होती थी। मुलाकात के सिलसिले में अबान कई बार बस स्टैंड के पास एक होटल में रुकता भी था। हर मुलाकात पर अबान अपने बड़े भाई के लिए नॉवेल और किताबें पढ़ने के लिए लाता था। गुरुवार को हादसे के बाद कार से दो किताब- 'द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान' और 'द इडियट' मिली थीं। हाईकोर्ट जज से अली बोला- जनाजे में जाने दीजिए अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद उमर के परिवार ने हाईकोर्ट में पैरोल की अर्जी दी थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े। उन्होंने कहा कि वे अपने भाई के जनाजे में शामिल होना चाहते हैं। दोनों ने कोर्ट को भरोसा दिया कि वे मीडिया से बात नहीं करेंगे, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट नहीं करेंगे, किसी सभा को संबोधित नहीं करेंगे और किसी दूसरे कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। कोर्ट ने इन शर्तों का सख्ती से पालन करने को कहा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अली और उमर को सीधे जेल से कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाए। वहां उन्हें अपने छोटे भाई अहजम और बुआ परवीन कुरैशी से एक घंटे तक मिलने की अनुमति दी गई है। यह मुलाकात पुलिस की निगरानी में होगी। इसके बाद दोनों को वापस जेल भेज दिया जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार और डीजीपी को दोनों की सुरक्षा और जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। झांसी जेल प्रशासन ने अली को ले जाने के लिए SSP को लेटर लिखा अतीक की बहन परवीन कुरैशी ने उमर और अली के पैरोल के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी। उनके अधिवक्ता मोहम्मद सफदर अली काजमी ने कोर्ट में ये बात रखी। जस्टिस अजय भनोट और डीसी सामंत की पीठ ने पैरोल पर आदेश दिया। अब झांसी जेल प्रशासन ने पुलिस गार्ड मुहैया कराकर पुलिस सुरक्षा में अली को प्रयागराज ले जाने के लिए SSP को लेटर लिखा है। अबान भाई से जेल मिलने जा रहा था, सड़क हादसे में हुई मौत ----------------------------- ये खबर भी पढ़िए- कार में 2 मिनट तड़पता रहा: बाहर निकाला तो बोला- मेरा नाम अबान, मुझे बचा लो; प्रत्यक्षदर्शी ने बताए आखिरी पल "मेरा नाम अबान है... मुझे बचा लो।" मुंह से इतना ही निकल पाया। लोगों ने उसे कार से बाहर निकाला, लेकिन तड़पते हुए दो मिनट में उसकी सांसें थम गईं। ये माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद (21) के आखिरी शब्द थे। पढ़ें पूरी खबर…
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